केतु तीसरे भाव में

केतु तीसरे भाव में

तृतीय (पराक्रम भाव)- इस भाव में केतू हो तो जातक चंचल, व्यर्थ का बोलने वाला तथा भूत-प्रेत को पूजा के माध्यम से वश में करने की इच्छा रखता है। भ्रमणशील, बुद्धिमान, कलाप्रेमी, दायें कान में कष्ट, हाथों में दर्द तथा भाइयों से विरोध सहने वाला अथवा उनकी हानि होती है परन्तु अपने शत्रुओं के लिये काल होता है। ऐसे जातक का लोगों से व्यर्थ का विवाद होता है। ऐसा जातक सभी सुख भोगता है। जातक को सदैव अपने परिवार की चिन्ता व मानसिक कष्ट रहता है। परिवार में किसी अन्य के झगड़े में जातक को बहुत पीड़ा होती है। अग्नि तत्व (मेष, सिंह व धनु) राशि का केतू जातक को बहरापन व हृदय रोग देता है और धनु अथवा मीन राशि में हो तो अध्यात्म में रुचि तथा मिथुन राशि में हो तो जातक सदैव अच्छे खाने-पीने में विश्वास रखता है।

नोट: उपरोक्त लिखे गए सभी तथ्य वैदिक ज्योतिष के आधार पर लिखे गए है, कुंडली में स्थित अन्य ग्रहों की स्थिति के अनुसार केतु के फल में विभिन्नता हो सकती है !