केतु दसवे भाव में

केतु दसवे भाव में

दशम (पिता व कर्म भाव)- इस भाव में केतू के प्रभाव से जातक भाग्यहीन, अपने पिता का विरोधी व द्वेष रखने वाला तथा व्यर्थ के कार्यों में श्रम करने वाला मूर्ख होता है। ऐसा जातक बार-बार होने वाले पतन व हानि के कारण अपना व्यवसाय बदलता रहता है। इसलिये उसका जीवन कष्ट में व्यतीत होता है। केतू यदि मेष, वृषभ कन्या, मिथुन अथवा वृश्चिक राशि में हो जातक शत्रुओं पर विजय पाने वाला व पराक्रमी होता है परन्तु मिथुन राशि में अपने पद से हाथ धोना पड़ता है। केतू यदि धनु व मीन राशि में हो तो यश व ऐश्वर्य की प्राप्ति के साथ अपने क्षेत्र में विजयी होता है। ऐसा जातक बुद्धिमान व अपने तर्क से लोगों को प्रभावित करने वाला होता है।

नोट: उपरोक्त लिखे गए सभी तथ्य वैदिक ज्योतिष के आधार पर लिखे गए है, कुंडली में स्थित अन्य ग्रहों की स्थिति के अनुसार केतु के फल में विभिन्नता हो सकती है !