केतु बारहवे भाव में

केतु बारहवे भाव में

द्वादश (व्यय भाव)- इस भाव में केतू के मिले-जुले फल प्राप्त होते हैं जिसमें जातक चंचल परन्तु चतुर बुद्धि, धूर्त प्रवृत्ति, जनता को भूत-प्रेत या अलौकिक शक्तियों के माध्यम से अथवा भय दिखाकर ठगने वाला, अधिकतर प्रवास पर रहने वाला होता है। मेरे अनुभव में ऐसे जातक को कुछ भी भूत-प्रेत या अलौकिक सिद्धि नहीं होती है अपितु वह ढोंग करके अथवा लोगों को ऊपरी शक्ति का भय दिखाकर अथवा किसी के वास्तव में पीड़ित होने पर उन्हें उससे मुक्ति दिलवाने का कहकर धन हड़पते हैं जो कि वास्तव में ठग करते हैं।

इसके लिये वह बिलकुल ऐसा व्यवहार करते हैं कि मानो उन्हें बहुत शक्ति प्राप्त है तथा यह प्रभाव डालने के लिये रहन-सहन भी बिलकुल राजसी रखते हैं। इसमें मैंने एक बात और देखी कि ऐसे लोग मांगलिक कार्यों में अच्छा खर्च करते हैं। मेरा यह कहना है कि वह तो वास्तव में ठग रहे हैं परन्तु जो भी उसमें नाटक कर रहे हैं वह कृत्य तो धार्मिक है भले ही वह ठगने के लिये हवन आदि करते हैं परन्तु वह भी होता तो मांगलिक ही है। ऐसे लोगों का अन्त बहुत बुरा होता है जिसमें मरणोपरान्त आँखें बन्द न होना, गुप्त अंगों में पीड़ा या रोग तथा नेख रोग होना है। ऐसा केतू यदि बुध के प्रभाव में हो तो व्यापार में लाभ देता है।

नोट: उपरोक्त लिखे गए सभी तथ्य वैदिक ज्योतिष के आधार पर लिखे गए है, कुंडली में स्थित अन्य ग्रहों की स्थिति के अनुसार केतु के फल में विभिन्नता हो सकती है !