चन्द्र पाचवे भाव में

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यदि कुंडली के पाचवे भाव में चन्द्र स्थित हो व्यक्ति अत्यधिक परिश्रमी होता है, परन्तु उसे जीवन में परिश्रम का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता ! पाचवे भाव में चन्द्र कन्या संतान अधिक देता है और यदि चन्द्र किसी पापी गृह से पीड़ित हो तो कन्या संतान अपंग भी हो सकती है ! किसी शुभ गृह के प्रभाव से पुत्र संतान भी होती है, इस चन्द्र पर यदि राहू का प्रभाव हो तो जातक की शिक्षा में बाधाये आती है, शिक्षा अधूरी भी रह सकती है ! जातक को पत्नी द्वारा भी धन की प्राप्ति होती है !

नोट :- उपरोक्त लिखे गए सभी फल वैदिक ज्योतिष और शास्त्रों के आधार पर लिखे गए है ! सभी बारह लग्नो के आधार और अन्य ग्रहों की स्थति के आधार पर फल बदल सकते है !

लेखक ज्योतिषी सुनील कुमार

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