नरेन्द्र मोदी एक गरीब से प्रधानमन्त्री तक

2014/09/02

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१७ सितम्बर १९५० का यह एक चमत्कारी दिन था जब गुजरात के एक छोटे से गाँव के एक घर में एक बच्चे ने जन्म लिया ! इस बच्चे ने एक गरीब घर में जन्म ज़रूर लिया था लेकिन वक्त ने पहले से ही उसके लिए बेहतरीन किस्मत का निर्माण कर रखा था , यह है भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, बचपन से एक महान व्यक्तित्व के मालिक और हमेशा से अर्जुन की भांति मन में दृढ विशवास लिए और एकाग्रता के साथ सिर्फ मछली की आँख को निशाना लगाने के समान सिर्फ अपने देश की सेवा का लक्ष्य अपने मन में लिए उन्होंने एक गरीब से इस देश के प्रधानमन्त्री बनने  तक का जटिल सफ़र तय किया ! मुझे पता है की मै  फिलहाल उनके सामने बैठ कर उनका साक्षात्कार करते हुए उनसे यह नहीं पुछ सकता की ये सफ़र उन्होंने कैसे तय किया, परन्तु वैदिक ज्योतिष के माध्यम से मै  नरेद्र मोदी की कुंडली का निरिक्षण कर इतना ज़रूर बता सकता हूँ की किस प्रकार उनकी कुंडली में स्थित ग्रहों और योगो ने मिलकर उन्हें इन बुलंदियों तक पहुचाया !

Narendra-Modi

किसी प्रकार मैंने इन्टरनेट पर नरेद्र मोदी की जन्म तारीख और समय प्राप्त किया तथा इस कुंडली का निर्माण किया ! इस कुंडली के अनुसार नरेद्र मोदी के जन्म के समय से लेकर सन १९६१ तक शनि की गृह दशा चली, इस दशा ने मोदी जी को प्राथमिक शिक्षा का अवसर दिलाया ! उनका बचपन उनके माता पिता और भाई के साथ बहुत संघर्ष में गुजरा, यहाँ तक की उन्हें बचपन में अपने भाई के साथ बस स्टेशन पर चाय बेचने जाना पढता था ! लेकिन शनि के बाद बुध की दशा में वह अपनी किशोरिय अवस्था में एक उन्नत वक्ता के रूप में सामने आये ! इस दौरान वह घंटो अपना समय लाइब्रेरी में गुज़ारा करते थे ! १९७१ में जब बुध में मंगल की दशा थी तब उन्होंने आर एस एस को ज्वाइन किया, मै यहाँ पर आपका ध्यान मंगल गृह की तरफ लाना चाहता हूँ जिसके द्वारा मोदी जी को अपने राजनीती जीवन की शुरुवात करने का मौका मिला ! आप देख सकते है की मोदी जी की कुंडली में मंगल की स्थिति प्रथम भाव में वृश्चिक राशी में है, यह मंगल इस कुंडली में एक पंचमहापुरुष योग [ रुचक योग ] का निर्माण करता है ! इसलिए मंगल की अन्तर्दशा के दौरान हुई शुरुआत उनके राजनीती जीवन के लिए अच्छी साबित हुई, परन्तु मंगल की यह स्थिति एक दोष यानि मांगलिक दोष का भी निर्माण करती है , फलस्वरूप शादीशुदा होने के बावजूद वह अपनी पत्नी के साथ ज्यादा समय व्यतीत नहीं कर सके और उन्हें अलग होना पड़ा !

सन १९७८ में शुक्र की दशा में मोदी जी ने बी जे पि अथवा भारतीय जनता पार्टी को ज्वाइन किया ! तब शुक्र में शुक तथा राहू की दशा चल रही थी, यहाँ मै आप लोगो का ध्यान राहू की तरफ लाना चाहता हूँ ! क्योकि राहू का मोदी जी के राजनीती जीवन में एक महत्वपूर्ण योगदान रहा, बल्कि यह कहना चाहिए यदि राहू का योगदान न होता तो शायद मोदी जी को इतनी कामयाबी प्राप्त नहीं होती ! आप यदि ध्यान देंगे तो पता चलेगा की राहू की स्थिति पाचवे भाव में गुरु की राशी [ मीन ] में स्थित है और गुरु पाचवे भाव के स्वामी होकर चौथे स्थान में स्थित है ! दोस्तों कुंडली का चौथा और पाचवा भाव  राजनीती के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, पाचवे स्थान से व्यक्ति के जनता के साथ संबंधो तथा चोथे भाव से व्यक्ति के राजनीती के स्तर की जानकारी प्राप्त होती है ! गुरु की स्थिति चौथे भाव में एक राजनीतिग्य के लिए वरदान की तरह कार्य करती है क्योकि गुरु की पूर्ण दृष्टि दसवे भाव पर जाने से व्यक्ति के  मान सम्मान में अत्यधिक वृद्धि होती है ! और राहू का सम्बन्ध पाचवे भाव सेहोने पर  व्यक्ति का जनता के साथ गहरा सम्बन्ध स्थापित होता है जिसका लाभ राहू की दशा में नरेन्द्र मोदी को प्राप्त हुआ और वे भारत वर्ष के प्रधानमंत्री के पद तक पहुच सके ! और आप देख सकते है की नवमांश में शुक्र भी राहू के साथ द्वितीय भाव में स्थित है इसी कारण शुक्र की दशा भी मोदी जी के राजनीती केरिअर में शुभ साबित हुई, शुक्र की दशा में ही मोदी जी को सन २००२ में मोदी जी को गुजरात का मुख्यमंत्री पद प्राप्त हुआ !  और मई २०१४ में चन्द्र – राहू – शुक्र में वे भारत के प्रधानमंत्री बनाए गए !

लेखक

ज्योतिष सुनील कुमार

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