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बुध कुंडली नौवे में

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नवम (धर्म व भाग्य भाव)- इस भाव में बुध शुभ फल अधिक देता है। इस बुध के प्रभाव से जातक ईश्वरवादी, भाग्यवान, सदाचारी व विद्वान होता है। लेखन, ज्योतिष, सम्पादक, कवि, गायक अथवा व्यवसाय के माध्यम से धन के साथ यश भी कमाता है। ऐसा व्यक्ति समस्त कार्यों को नई दृष्टि से देखता है। प्रत्येक कार्य में शाध अवश्य करता है व सफल भी होता है। बुध अशुभ प्रभाव में होने पर व्यक्ति को व्यर्थ में ही इधर-उधर भटकने की आदत होती है। यहाँ पर बुध यदि अष्टम भाव का स्वामी हो तो व्यक्ति अन्य लोगों का धन चतुराई से हड़पता है। पृथ्वी तत्व (वृषभ, कन्या व मकर) राशि का बुध व्यक्ति को व्यवसाय अथवा लिपकीय कार्य करवाता है।

अग्नि तत्व (मेष, सिंह व धनु) राशि में बुध के होने से जातक की गणित में अधिक रुचि होती है। इसलिये इस योग में व्यक्ति गणित अध्यापक, ज्योतिषी अथवा लेखाकार के रूप में धनोपार्जन कर सकता है। यहाँ पर यदि बुध के साथ शनि स्त्री राशि (वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर व मीन) में हो तो गोचर में शनि जब इस भाव में विचरण करेगा तो जातक को मातृ शोक की सम्भावना होती है। वायु तत्व (मिथु न, तुला व कुंभ) राशि में बुध के प्रभाव से जातक का भाग्योदय विवाह के बाद ही होता है। वह इस योग के साथ पत्रिका में अन्य योगों के आधार पर वह व्यवसाय अथवा नौकरी करे तो उसमें सफल होता हैं यदि जातक गणित से सम्बििन्धत कार्य अथवा मस्तिष्क का प्रयोग होने वाले कार्य करे तो अधिक सफल होता है। जल तत्व (कर्क, वृश्चिक व मीन) राशि में बुध हो तो जातक केवल लिपिक स्तर तक ही कार्य करता है लेकिन वह मस्तिष्क का बहुत तेज होता है।

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