मंगल पांचवे भाव में

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यदि मंगल कुंडली के पांचवे भाव में स्थित हो तो ये जातक की संतान के लिए अशुभ कारी होता है ! कुंडली का पांचवा भाव विशेष कर जातक की विद्या और संतान से सम्बंधित होता है, इस स्थान पर किसी भी पाप गृह का प्रभाव हो तो जातक को पढ़ाई और संतान सम्बन्धी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है ! पांचवे स्थान में अशुभ मंगल की स्थिति संतान की मृत्यु का कारण बन सकती  है ! स्त्री कुंडली में यह मंगल, गर्भपात जैसी कठिनाइयों का कारण बनता है ! यदि प्रथम संतान पुत्र हो तो उसकी मृत्यु की अत्यधिक सम्भावना रहती है ! परन्तु ऐसा मंगल के विशेष अशुभ और कुंडली के अन्य अशुभ योगो के कारण ही होता है ! यदि किसी अन्य शुभ ग्रहों की स्थिति अच्छी हो तो मंगल के अशुभ फलों में कमी आती है !

नोट :- उपरोक्त लिखे गए सभी फल वैदिक ज्योतिष और शास्त्रों के आधार पर लिखे गए है ! सभी बारह लग्नो के आधार और अन्य ग्रहों की स्थति के आधार पर फल बदल सकते है !

लेखक  ज्योतिषी सुनील कुमार

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