मेरी शादी कब होगी ?

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वैदिक ज्योतिष के अनुसार किसी जातक का विवाह तब होता है जब उसकी कुंडली के अनुसार सप्तमेश की दशा या अन्तर्दशा , सातवे घर में स्थित ग्रहों की दशा या अन्तर्दशा अथवा सातवे घर को देखने वाले ग्रहों दशा अन्तर्दशा आती है , यदि छठे घर से सम्बंधित दशा या अन्तर्दशा चल रही हो तो विवाह में देरी अथवा विघ्न आते है!

अब यदि दशा या अंतर दशा विवाह के लिए मंजूरी देते है तो गोचर के ग्रहों की मंजूरी लेना भी आवशयक होता है, सबसे पहले गुरु और शनि की मंजूरी होनी चाहिए ! जब गुरु और शनि गोचर में कुडली में लग्न से सातवे स्थान से सम्बन्ध बनाते है , चाहे दृष्टि द्वारा या अपनी स्थिति द्वारा , तो वह कुंडली में विवाह के योग का निर्माण करते है , लेकिन इस स्थिति में गोचर के ग्रहों का मूर्ति निर्णय जाचना आवश्यक होता है ! क्योकि यदि मूर्ति निर्णय शुभ न हुआ तो विवाह में परेशानिया उत्पन्न हो सकती है ! जिस घरों में गृह गोचर करते है उन घरों से सम्बंधित अष्टक वर्ग के नंबर अवश्य अवश्य होने चाहिए, अन्यथा ग्रहों की मंजूरी के उप्रात्न भी विवाह नहीं हो सकता !

इसके बाद मंगल और चन्द्र ग्रहों का सम्बन्ध, पाचवे और नौवे घर से होना चाहिए ! शुभ और सुखी विवाहित जीवन के लिए १२ वे और ११ वे घरों की शुभता भी आवशयक है ! यदि विवाह प्रेम से सम्बंधित है तो पाचव घर के बल की आवशयकता होती है ! छठा और दसवां घर विवाह में रूकावट उत्पन्न करता है , यदि दशा और अन्तर्दशा इस घरों से सम्बंधित है तो विवाह नहीं होगा , इन दशाओं में यदि विवाह हो भी जाए तो ज्यादा समय तक सम्बन्ध नहीं चलता तथा तलाक हो जाता है!

यदि दशानाथ और अन्तर्दशा नाथ विवाह की मंजूरी नहीं देते और गोचर के गृह विवाह का योग नहीं बनाते तो विवाह में देरी , विवाह न होना अथवा विवाह के पश्चात् तलाक हो सकता है!

लेखक सुनील कुमार

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