रत्न ज्योतिष

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वैदिक ज्योतिष के अनुसार रत्नों के प्रभाव !

वैदिक ज्योतिष में रत्नों का एक विशेष महत्व है, युगों युगों से रत्न वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की पीड़ा से मुक्ति प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल किये जा रहे है, पहले जमाने में केवल राजा महाराजा और उच्च स्तर के लोग ज्योतिषियों द्वारा बताये गए राशी के रत्नों को धारण कर लाभ उठाते थे लेकिन आज के जमाने में हर वर्ग के लोग इनको धारण कर इनसे लाभ उठा रहे है! आज कल ग्रहों की पीड़ा से मुक्ति के लिए रत्न पहनने का प्रचलन बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है! क्योकि जो लोग इन रत्नों को धारण कर रहे है उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में लाभ मिल रहा है चाहे व्यवसाय, पढाई, बीमारी या तरक्की क्यों न हो सभी क्षेत्रो में रत्न का विशेष महेत्व है! बड़े-बड़े उद्योग पति से लेकर फ़िल्मी क्षेत्र की जानी मानी हस्तियों द्वारा इन्हें धारण कर लाभ उठाया जा रहा है! मेरे अनुभव से केवल असली राशी रत्नों से ही पूरा लाभ उठाया जा सकता है, क्योकि असली रत्नों में ही उसके प्रतिनिधि गृह से जुडी विशेष कार्य शमता होती है जो उस गृह के अच्छे या बुरे प्रभावों को आपके जीवन में बढ़ाते या घटाते है! वैदिक ज्योतिष के अनुसार ९ विशेष रत्न हमारे ९ ग्रहों का प्रतिनिधित्व करते है,

माणिक्य प्रतिनिधित्व करता है सूर्य का , इसी प्रकार मोती चन्द्र का, मूंगा मंगल का, पन्ना बुद्ध का, पुखराज गुरु का, नीलम शनि का, गोमेद राहू का और लहसुनिया केतु का प्रतिनिधित्व करता है ! इन रत्नों को धारण करने से पहले यह जान लेना अति आवश्यक है की जो रत्न आप धारण करने जा रहे है वह आपकी कुंडली के अनुसार आपके पक्ष में हो ! अन्यथा विपक्ष में होने की स्थिति में वह लाभ की जगह नुक्सान भी कर सकता है! इसलिए जब भी आप कोई रत्न धारण करना चाहते है तो किसी अनुभवी ज्योतिष आचार्य की राय से ही इन्हें धारण करे!

लेखक सुनील कुमार

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