राहु छटे भाव में

राहु छटे भाव में

षष्ठ (शत्रु व रोग भाव)- इस भाव में राहू के शुभ फल अधिक आते हैं। इस राहू के प्रभाव से जातक बहुत ही प्रभावशाली व पराक्रमी होता है। उसको लाभ भी अपने विरोधियों अथवा ऐसे लोगों से मिलता है जिन्हें हम विधर्मी कहते हैं। वह सदैव बड़े-बड़े कार्य करता है। जिस स्थान पर उसे बोलना चाहिये वहाँ वह अक्सर चुप रहता है। ऐसा जातक वैसे तो अधिकतर निरोगी रहता है परन्तु कमर दर्द, नेत्र व दंत रोग से पीड़ित रहता है। अपने मामा व मौसी के लिये भी कष्टकारक होता है। यहाँ पर राहू यदि किसी शुभ ग्रह के प्रभाव में हो तो उसका भाग्योदय युवावस्था में ही हो जाता है। आजीविकास भी उसे बिना किसी बाधा के शीघ्रता से मिलती है।

यदि राहू स्त्री राशि (वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर व मीन) में आकर शुभ प्रभाव में हो तो फिर शुभ फल बहुत अधिक मिलते हैं। जातक को आर्थिक समृद्धि, शारीरिक निरोगता, पूर्ण पारिवारिक सुख, राज्य लाभ प्राप्त होता है। शत्रु भी सम्मान करते हैं। यदि राहू पुरुष राशि (मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु व कुंभ) में हो तो फिर जातक का बचपन बहुत ही कष्ट में व्यतीत होता है। बच्चे को मस्तिष्क रोग, भूत-पिशाच बाधा, नेत्र रोग की पूर्ण सम्भावना होती है। यदि शनि भी दुष्प्रभाव में हो तो कुष्ठरोग व मिरगी भी हो सकती है। ऐसे जातक को वाहन चालन में सदैव एकाग्रता रखनी चाहिये अन्यथा भीषण दुर्घटना का भय रहता है। यहाँ पर राहू किसी भी प्रभाव में क्यों न हो, कुछ न कुछ शुभ फल अवश्य देता है जिसमें धनलाभ व शत्रुतहीनता मुख्य होती है।

नोट: उपरोक्त लिखे गए सभी फल वैदिक ज्योतिष के आधार पर लिखे गए है, कुंडली में अन्य ग्रहों की स्थिति के कारण फलों में विभिन्नता हो सकती है !