शुक्र ग्यारहवे भाव में

शुक्र ग्यारहवे भाव में

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एकादश (आय भाव)- इस भाव में शुक्र शुभ फल अधिक देता है जो आर्थिक क्षेत्र में अधिक शुभ हो जाते हैं। जातक भाग्यवान, स्थिर लक्ष्मी का स्वामी, रत्नों व सफेद वस्तुओं से लाभ प्राप्त करने वाला, विलासी प्रवृत्ति, वाहनसुखी, गुणवान, ज्ञानवान, संगीत व फिल्मों का शौकीन व पुत्र सन्तति से युक्त होता है। ऐसे जातक की आयु के साथ ख्याति में भी वृद्धि होती है। व्यक्ति कला प्रेमी होता है। यह योग यदि किसी पुरुष की पत्रिका में निर्मित हो तो वह स्त्री वर्ग में बहुत लोकप्रिय होता है। एकसा जातक दिल का बहुत साफ होता है, अपने मित्रों का मन से हितैषी व समय पर समस्त प्रकार से मदद करने वाला होता है परन्तु उसे सही मित्र नहीं मिलते हैं। मित्रों की ओर से धोखा मिलता है।

यहाँ पर यदि अग्नि राशि में शुक्र हो तो पुत्र सन्तति नहीं होती है। व्यवसाय से हानि होती है, आय से अधिक व्यय होता है। किसी पाप ग्रह का प्रभाव हो तो जातक किसी नशे का आदी होता है। स्त्री पक्ष से लाभ उठाता है परन्तु रिश्ते के अतिरिक्त ही महिला वर्ग से सम्मान व लाभ मिलता है। मैंने इस शुक्र का यह फल देखा है कि वह भले ही किसी भी राशि में क्यों न हो और जातक स्त्री या पुरुष कोई भी हो परन्तु ऐसा जातक अफवाहों का शिकार अवश्य रहता है। अफवाहें भी ऐसी फैलती हैं जो वह करता नहीं है। शुक्र जल तत्व (कर्क, वृश्चिक व मीन) राशि में भी पुत्र सन्तति नहीं होती है। स्त्री राशि (वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक व मीन) राशि में भी पुत्र सन्तति नहीं होती है।

स्त्री राशि (वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर व मीन) में पुत्र सन्तति अधिक मिलती हीै। जातक कन्या सन्तति की इच्छा रखता है परन्तु कन्या सन्तति जीवनसाथी के योग के आधार पर ही मिलती है। मंगल की युति होने पर प्रथम संतान की हानि होती है अथवा गर्भपात होता है। शनि की युति हो तथा शनि लग्नेश भी हो तो जातक कम आयु से ही शारीरिक भाग करने लगता है। 24 से 37 वर्ष की आयु तक जीवन में संघर्ष रहता है तथा 36वें वर्ष में दुर्घटना के कारण विकलांगता आती है। वायां घुटना बेकार हो जाता है। जैसे-जैसे आयु अधिक होती है, वैसे ही धन के साथ यश वृद्धि भी अधिक होती जाती है। नशों के कारण कुछ आर्थिक अस्थिरता रहती है परन्तु कार्य सारे चलते रहते हैं।

यहाँ पर यदि गुरु की भी युति हो तो जातक शनि की साढ़ेसाती व गुरु की महादशा के एक साथ आरम्भ होने पर दूसरे कुल की विद्या सीखता है। यदि बुध नवम भाव में बैठा हो तो जातक ज्योतिष के क्षेत्र में सफल हो सकता है। ऐसा जातक उच्च स्तर का लेखक होता है। लेखों के माध्यम, से वह ज्ञान दान करता है व पुस्तक लेखन भी करता है। ऐसा जातक बहुत ही ज्ञानी होता है। जिस कार्य को वह नहीं जानता उसमें भी वह कार्य करने की क्षमता रखता है

Note: उपरोक्त लिखे गए सभी शुक्र के फल वैदिक ज्योतिष पर आधारित है , कुंडली में स्थित अन्य ग्रहों के आधार पर फल बदल सकते है ! 

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