शुक्र दशम भाव में

शुक्र दशम भाव में

Click here to read in english 

दशम (पिता व कर्म भाव)- इस भाव में शुक्र जातक को विलासी प्रवृत्ति का, राज्यमान, सुखी, ऐश्वर्यशाली, सभी के साथ न्याय करने वाला तथा गीत-संगीत व ज्योतिष में रुचि रखने वाला होता है। इस भाव का शुक्र जातक को राज्य में सम्मान अथवा कोइ्र पद के साथ पुरस्कार भी दिलवाता है। जातक विपरीत लिंग से भी आर्थिक सहायता व समृद्धि प्राप्त करता है। उसे उच्च अधिकारियों से भी लाभ प्राप्त होता है। ऐसा जातक देवताओं के साथ अपने माता-पिता की भक्ति में लीन रहता है। माता-पिता भी उसकी सेवा से प्रसन्न होकर अपनी पैतृक सम्पत्ति का अधिक हिस्सा उसे देते हैं। कानून के क्षेत्र का विद्वान होता है।

यदि शुक्र पाप प्रभाव में हो तो जातक आर्थिक रूप से समृद्ध होता है परन्तु काम वासना में ज्यादा लिप्त होता है। इसी दुर्गुण के कारण उसके अवैध सम्बन्ध बनते हैं जिसके कारण उसे आर्थिक क्षति के साथ सम्मान की क्षति भी होती है। शुक्र यदि वायु अथवा अग्नि राशि में हो तो जातक विज्ञान के क्षेत्र में रुचि रखता है तथा उच्च शिक्षा प्राप्त करता है। अपनी मेहनत से वह इस क्षेत्र में उन्नति भी करता है। वह उच्च पद प्राप्त करता है तथा आजीविका भी इस क्षेत्र से ही चलाता है। ऐसे जातक कला, गणित, ज्योतिष व संगीत में भी रुचि व ज्ञान रखते हैं। वह यदि व्यवसाय करें तो उसमें भी वह सफल रहते हैं।

शुक्र यदि इस भाव में स्त्री राशि (वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर व मीन) तथा शुभ प्रभाव में हो तो जातक का भागयोदय विवाह के बाद होता है। अल्पसन्तति होती है। ऐसे जातकों में एक विशेषता यह होती है कि वह किसी के भी अधीन कार्य नहीं कर सकते हैं। इस कारण वह स्वतन्त्र व्यवसाय करते हैं तथा सफल होते हैं। वह किसी न किसी नशे के आदी हो सकते हैं। धन कमाते तो बहुत हैं परन्तु जोड़ नहीं पाते हैं।

शुक्र किसी पुरुष की पत्रिका में यदि पुरुष राशि (मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु व कुंभ) में हो तो जातक का ध्यान विवाह करने में नहीं होता है। पहले वह धन कमाने की सोचता है, उसके बाद ही उसका मन विवाह के लिये होता है लेकिन तब तक देर हो जाती है। शारीरिक कमजोरी के कारण स्त्री सुख में कमी तथा संतान की भी चिन्ता होती है। यदि किसी अन्य योग से दोनों सुख मिल भी जायें तो व्यापार चौपट हो जाता है। ऐसा योग यदि किसी स्त्री की पत्रिका में हो तो उसका ध्यान ससुराल पक्ष की ओर अधिक होता है क्योंकि उसका पति उसकी ओर ठीक से ध्यान नहीं देता है। किसी पाप ग्रह का भी प्रभाव हो तो फिर वह किसी ऐसे व्यक्ति से सम्बन्ध बनाती है जिसके बारे में कोई गलत सोच भी नहीं सकता है। उसकी आयु का निर्णय शुक्र के अंश करते हैं अर्थात् शुक्र यदि कम अंश पर हो तो वह कम आयु का होगा और अधिक अंश होने पर स्त्री से अधिक आयु का होगा।

Note : उपरोक्त लिखे गए शुक्र के प्रभाव वैदिक ज्योतिष के आधार पर लिखे गए है, अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर शुक्र के प्रभाव बदल सकते है !

अगला अध्याय – शुक्र ग्यारहवे भाव में

 पिछला अध्याय –   शुक्र नवम भाव में