सूर्य कुंडली के द्वितीय भाव में

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यदि सूर्य कुंडली के द्वितीय भाव में स्थित तो जातक सम्पत्तिवान, मुखरोगी, भाग्यवान, आँख, कान व् दन्त रोगी तथा झगड़ालू होता है | ऐसा व्यक्ति स्वयं का व्यवसाय करता है तथा नौकरी करना पसंद नहीं करता | पिता से अधिकतर विरोध रहता है, नेत्रों में जलन तथा नेत्र कमज़ोर होते है | ऐसा व्यक्ति भोजन का बहुत शौकीन होता है तथा ५ स्तरीय भोजनालय में भोजन करना पसंद करता है |
सूर्य यदि द्वितीय भाव में कुम्भ, तुला अथवा मिथुन राशि में स्थित हो तो जातक बहुत कंजूस होता है, धन तो बहुत कमाता है परन्तु कंजूस होने के कारण धन का व्यव नहीं करता | कंजूस प्रवर्ति के कारण उसके सामाजिक रिश्ते अच्छे नहीं होते तथा उसको किसी की सहानुभूति प्राप्त नहीं होती |
यदि सूर्य कुंडली के द्वितीय भाव में कर्क, मीन अथवा वृश्चिक राशि में स्थित हो तो व्यक्ति उच्च अधिकारी बन सकता है | ऐसे व्यक्ति को निजी संसथान में नौकरी करने से अधिक लाभ मिलता है | धनु राशि में सूर्य जातक के मन में बहुत आगे बढ़ने की इच्छा उत्त्पन्न करता है परन्तु व्यक्ति स्वार्थी हो सकता है |
यदि सूर्य कुंडली के द्वितीय स्थान में मकर, कुंभ, मीन, धनु हो तो तथा द्वितीय भाव के स्वामी कमज़ोर अवस्था में छटे, आठवे और बारहवे भाव में जातक बहुत गरीब व्यक्ति होता है और स्थिति जयादा खराब होने पर उसे भीख भी मांगनी पड़ सकती है |

उपरोक्त लिखे सूर्य के द्वितीय भाव में फल भारतीय वैदिक ज्योतिष के आधार पर लिखे गए है, अन्य ग्रहो की की दृष्टि और अवस्था के आधार पर सूर्य के फल में अंतर आ सकता है |

ज्योतिष सुनील कुमार

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