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सूर्य तीसरे भाव में

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सूर्य की स्थिति यदि कुंडली के तीसरे भाव में हो तो व्यक्ति अत्यधिक पराकर्मी होता है,  राज्य में सम्मान पाने वाला, कवि, प्रतापशाली, समाज में सम्मान पाने वाला, बन्धुविहीन विशेषकर छोटे भाई या तो होते नहीं हैं, अगर होते हैं तो विरोध रहता है अथवा जीवित नहीं रहते। बड़े भाई की मृत्यु की भी सम्भावना होती है। इसके बाद किसी अन्य ग्रह के प्रभाव से यदि भाई हो तो दोनों को साथ नहीं रहना चाहिये अन्यथा दोनों में से किसी का भी भाग्योदय नही होगा। यदि पाप ग्रह के साथ हो तो व्यक्ति हिंसक प्रवृत्ति का होता है। यहाँ मेष राशि अर्थात् उच्च का सूर्य कमजोर मानसिकता, बातूनी व आलसी बनाता है। अन्य पुरुष राशि (मिथुन, सिंह, तुला, धनु व कुम्भ) में सूर्य बुद्धिमान, स्थिर व शान्त स्वभाव, विवेकवान, सामाजिक कार्य में रुचि लेने वाला बनाता है। इस योग की सबसे बड़ी कमी यह होती है कि ऐसा व्यक्ति सभी पर अपना अधिकार जमाने वाला होता है। इस योग के कारण भाइयों की समस्या का समाधान भी आसानी से हो जाता है। स्त्री राशि (वृषभ, कन्या, कर्क, वृश्चिक व मीन) का सूर्य सम्पत्ति के कारण अथवा विभाजन के समय झगड़े करवाता है। मामला कोर्ट-कचहरी तक भी पहुँच जाये तो बड़ी बात नहीं है।

नोट :- उपरोक्त लिखे गए सूर्य के बारह भावो के फल वैदिक ज्योतिष और शास्त्रों के आधार पर लिखे गए है ! कुंडली के बारह लग्नो के आधार पर सूर्य के भाव फल में विभिन्नता हो सकती है !

लेखक

ज्योतिषी सुनील कुमार

अगला अध्याय – सूर्य चौथे भाव में 

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