सूर्य दुसरे भाव में

दुसरे भाव में सूर्य व्यक्ति को मुख, आँख अथवा कान रोगी बना सकता है, जातक सम्पत्तिवान अवश्य बन सकता है परन्तु कुटुंब परिवार से बनती नहीं अथवा कुटुंब परिवार से अलग रह सकता है, ऐसे व्यक्ति विशेषकर एकांत प्रिय होते है, नौकरी करने में विशेष रूचि नहीं दिखाते तथा अपना स्वतंत्रत व्यवसाय करना पसंद करते है ! ऐसे व्यक्ति खाने पिने के अत्यधिक शोखीन होते है, यदि गलत लत पड़ जाए तो मुख रोगी, पेट रोगी हो जाते है !

 

नोट :- उपरोक्त लिखे गए सूर्य के बारह भावो के फल वैदिक ज्योतिष और शास्त्रों के आधार पर लिखे गए है ! कुंडली के बारह लग्नो के आधार पर सूर्य के भाव फल में विभिन्नता हो सकती है !

लेखक

ज्योतिषी सुनील कुमार

 

सूर्य पहले भाव में 

सूर्य दुसरे भाव में 

सूर्य तीसरे भाव में 

सूर्य चौथे भाव में 

सूर्य पाचवे भाव 

सूर्य छ्टे भाव में 

सूर्य सातवे भाव में 

सूर्य आठवे भाव 

सूर्य नौवे भाव में

सूर्य दसवे भाव में

सूर्य ग्यारहवे भाव में 

सूर्य बारहवे भाव में 

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