हीरा

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वैदिक ज्योतिष के अनुसार हीरा रत्न, शुक्र गृह का प्रतिनिधित्व करता है वैदिक ज्योतिष के अनुसार हीरा रत्न, शुक्र गृह का प्रतिनिधित्व करता है ! यह एक अत्यंत प्रभावशाली रत्न होता है और इसका बहुत छोटा आकार भी बाज़ार में काफी कीमत रखता है ! ज्यदातर हीरा स्त्री वर्ग का पसंदीदा रत्न है ! और हो भी क्यों न, ज्योतिष के अनुसार शुक्र को भी सुन्दरता और स्त्री वर्ग के साथ जोड़ा गया है ! इसीलिए सीधे तोर पर हीरे का गहरा सम्बन्ध स्त्री वर्ग से स्थापित होता है ! शुक्र गृह सुन्दरता, वैभव और एश्वर्य तथा भोग विलास का गृह है ! सुखी ववाहिक जीवन के लिए भी शुक्र गृह का शुभ स्थिति में होना आवश्यक है ! और हीरे का सम्बन्ध सीधे तोर पर शुक्र से होने पर इन सभी प्रकार के सुख और वैभव की प्राप्ति हीरा धारण करने से होती है ! क्योकि हीरा धारण करने से हम शुक्र को बलि करते है है,

फल स्वरूप शुक्र हमें उससे जड़े सभी वैभव और सुख प्रदान करता है ! विवाह सुख की प्राप्ति के लिए हीरा अवश्य धारण करना चाहिए क्योकि इसके धारण करने से वर वधु के बिच मधुर सम्बन्ध स्थापित होता है और वे आजीवन ववाहिक जीवन का सुख प्राप्त करते है !स्त्री वर्ग से जुड़े व्यापारियों के लिए भी हीरा शुभ फलदायक होता है जैसे आभूषण, कपडे, साज सज्जा का सामान आदि ! फ़िल्मी क्षेत्र अथवा टेलीविजन क्षेत्र से जुड़े लोगो को भी हीरा अवश्य धारण करना चाहिए क्योकि इन व्यवसायों में शुक्र गृह की बहुत बड़ी भूमिका होती है ! शुक्र की शुभता को प्राप्त किये बिना  फ़िल्मी क्षेत्र, टेलीविजन क्षेत्र और मोडलिंग में सफलता प्राप्त करना नामुमकिन है ! जिन जातको की कुंडली में शुक्र गृह शुभ स्थिति में तथा शुभ प्रभाव दे रहा हो उन्हें हीरा अवश्य धारण करना चाहिए और यदि शुक्र की स्थिति ठीक न हो और शुक्र से जुड़े क्षेत्रों में परेशानिया उत्त्पन्न हो रही हो तो शुक्र के उपायों द्वारा अपनी परेशानियों का हल करें ! शुक्र रत्न हीरा धारण करने से पहले अनुभवी ज्योतिष की सलाह अवश्य लें अन्यथा अशुभ होने की स्थिति में यह फायदा देने की बजाय नुक्सान दे सकता है !

हीरा रत्न धारण करने की विधि :

यदि आप शुक्र देव का रत्न हीरा धारण करना चाहते है, तो 0.50 से 2 कैरेट तक के हीरे को चाँदीया सोने की अंगूठी में जड्वाकर किसी भी शुक्लपक्ष के शुक्रवार को सूर्य उदय के पश्चात अंगूठी को दूध, गंगा जल, शक्कर और शहद के घोल में डाल दे! उसके बाद पाच अगरबत्ती शुक्रदेव के नाम जलाये और प्रार्थना करे की हे शुक्र देव मै आपका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आपका प्रतिनिधि रत्न,हीरा धारण कर रहा हूँ , कृपया करके मुझे आशीर्वाद प्रदान करे! तत्पश्चात अंगूठी को निकाल कर ॐ शं शुक्राय नम: का 108 बारी जप करते हुए अंगूठी को अगरबत्ती के उपर से घुमाए फिर मंत्र के पश्चात् अंगूठी को लक्ष्मी जी  के चरणों से लगाकर कनिष्टिका या मध्यमा  ऊँगली में धारण करे!  हीरा अपना प्रभाव 25 दिन में देना आरम्भ कर देता है, और लगभग 7 वर्ष तक पूर्ण प्रभाव देता है फिर निष्क्रिय हो जाता है! 7 वर्ष के पश्चात् पुनः नया हीरा धारण करे! अच्छे प्रभाव प्राप्त करने के लिए हीरे का रंग सफ़ेद और कोई काला दाग नहीं होना चाहिए !

लेखक, सुनील कुमार

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