कुंडली मिलान

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विवाह करना हमारे जीवन का अत्यधिक महत्वपूर्ण फैसला होता है ! और एक सुखी ववाहिक जीवन के लिए एक अच्छे जीवन साथी का मिलना अतिआवश्यक होता है ! क्या थोडा सा समय बिताकर हम किसी के साथ पूर्ण जीवन व्यतीत करने का फैसला कर सकते है ? यदि नहीं तो क्या कोई ऐसा तरीका है जिसके द्वारा हम यह जान सके की हम जिस व्यक्ति के साथ विवाह करने वाले है, उसके साथ हमारा वैवाहिक जीवन कैसा होगा ! वैदिक ज्योतिष के द्वारा हम यह जान सकते है !

हम हमेशा गुण मिलान और कूट मिलान द्वारा दो कुंडलियों को मिलाने की कोशिश करते है ! और प्राप्त अंको द्वारा इस नतीजे पर पहुचते है की ववाह करना चाहिए या नहीं ! परन्तु मै आपसे यह पूछना चाहता हूँ की क्या ऐसा करना पर्याप्त है ! मैंने ऐसी बहुत सी कुड्लिया देखि है जिनके गुण मिलान ३६ अंको में से २५ अंको और अधिक भी थे परन्तु उनके तलाक हो गए, और ऐसी भी कुड्लिया देखि गई जिनके सिर्फ १० या १५ अंको होने के उपरान्त भी उन्होंने एक सुखी वैवाहिक जीवन व्यतीत किया ! अब आप ही बताइए की सिर्फ गुण मिलान के आधार पर हम किसी ववाह की अनुमति कैसे दे सकते है ! क्योकि गुण मिलान के आलावा भी ऐसे कई तथ्य मोजूद है जिनका ध्यान पूर्वक निरक्षण करना अति आवश्यक है ! जैसे जीवन साथी पूर्ण उम्र , अच्छे स्वास्थ्य और धन के योग, संतान उत्पन्न करने की शमता, मंगल दोष आदि तथ्यों का अध्यन एक सुखी वैवाहिक जीवन के लिए अत्यधिक आवश्यक है !

लम्बी उम्र के लिए हमें आठवे भाव का निरिक्षण करना चाहिए ! लग्नेश , अष्टमेश से अधिक बलवान होना अनिवार्य है ! उपाचय स्थानों पर शुभ और बलवान ग्रहों स्थिति लम्बी उम्र के लिए अच्छी होती है !

सातवे भाव , आठवे भाव और शुक्र गृह का बलवान होना एक सिखी वैवाहिक जीवन के लिए अतिआवश्यक है ! सातवा भाव हमारे विवाह , जीवन साथी, शारीरिक सम्बन्ध और गुप्त अंगों से सम्बन्ध रखता है! यदि सातवे भाव पर अशुभ ग्रहों की स्थिति, दृष्टि या अशुभ प्रभाव हो तो जीवन में विवाह सम्बन्धी समस्याए आती है ! विवाह में देरी, विवाह में क्लेश रहना , शारीरिक संबंधो में कमी या गुप्त अंगों कसे सम्बंधित बिमारिया भी हो सकती है ! अब यदि स्त्री की कुंडली में आठवा भाव पीड़ित हो तो पति की लम्बी बीमारी या मौत का संकेत भी हो सकता है ! यदि आठवे भाव पर अशुभ ग्रहों का प्रभाव हो तो सीधे तौर पर जीवन साथी की उम्र पर असर पड़ता है ! इसलिए कुंडली मिलान के दोरान सातवे और आठवे भावों का निरिक्षण करना अति आवश्यक है !

लेखक सुनील कुमार