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कुंडली के छटे भाव में

Mercury in sixth house of horoscope

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षष्ठ (शत्रु व रोग भाव)- इस भाव में बुध प्रायः अशुभ फल अधिक देता है। व्यक्ति आलसी, नित्य नये विषय पर कलह व विवाद करने वाला व रोगी होता है। मैंने अनुभव किया है कि यहाँ पर बुध रोग अवश्य देता है। व्यक्ति रोगों से लड़ते-लड़ते कमजोर हो जाता है। इसी कमजोरी के कारण वह चिड़चिड़ा हो जाता है। उसे कोई बात सहन नहीं होती। इसी कारण से उसकी शिक्षा में भी अवरोध आते हैं। जातक विपरीत लिंगी का विशेष प्रेमी होने के साथ-साथ अत्यधिक कामी होता है।

यदि शनि का प्रभाव हो तो जातक केवल मानसिक सुख ही प्राप्त कर सकता है अर्थात यदि पुरुष है तो नपुंसक हो सकता है और यदि महिला है तो वह लोक-लाज के भय से कोई ऐसा कार्य नहीं करेगी जिससे उसकी बदनामी हो परन्तु शनि के साथ राहू का प्रभाव होने से महिला अनैतिक कार्य कर सकती है। जातक उदरपीड़ा से कष्ट पाता है। दूसरों से लड़ाई-झगड़ों में पराजित होकर अपमान पाता है। इस भाव में बुध यदि चन्द्र से युत अथवा द्रष्ट हो तो जातक आत्महत्या भी कर सकता है। यदि साथ में मंगल का भी प्रभाव हो तो जातक मानसिक सन्तुलन खो देता है। केवल मंगल के प्रभाव से जातक अंतड़ियों के रोग से अथवा अपेन्डिसायटिस की शल्य क्रिया से पीड़ा पाता है। छठे भाव में बुध मंगल की किसी भी राशि में हो तथा कोई भी पाप ग्रह का प्रभाव हो तो जातक को कुष्ठ रोग की सम्भावना होती है। ऐसे व्यक्ति को केवल शाकाहारी भोजन ही करना चाहिये।

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