WILL ARVIND KEJRIWAL BECOME THE CM OF DELHI ONCE AGAIN

क्या अरविन्द केजरीवाल दोबारा दिल्ली के मुख्यमंत्री बनेंगे ?

28-10-2014

Click here to read in english

अरविन्द केजरीवाल का जन्म १६ अगस्त १९६८ रात ११:४६ पर हरियाणा के हिसार में हुआ!

२८ दिसम्बर २०१३ को उन्होंने दिल्ली के सातवे मुख्यमंत्री के पद की शपथ ली और १४ फ़रवरी २०१४ को जन लोकपाल बिल ख़ारिज होने की वजह से उन्होंने मुख्यमत्री पद से त्यागपत्र दे दिया !

आज २८ अक्टूबर २०१४ के दिन सभी दिल्ली वासी तथा अधिकतर देश वासियों के दिल में एक सवाल बार बार उठ रहा है की क्या अरविन्द केजरीवाल दोबारा दिल्ली के मुख्मंत्री पद की शपथ लेंगे ? मेरे भी मन में यही सवाल काफी दिनों से घूम रहा था इसलिए आज मैंने कुछ समय निकाल कर अरविन्द केजरीवाल की कुंडली पर नजर दोडाने का फैसला किया !

दोस्तों आज हम यह जानने की कोशिश करेंगे की क्या अरविन्द केजरीवाल की कुंडली में स्थित गृह दोबारा से उनको मुख्यमंत्री के पद तक पंहुचा सकते है? यह बात सिर्फ इस आधार पर खोजने की कोशिश होगी की यदि दिल्ली में दोबारा से विधान सभा चुनाव होते है तो केजरीवाल के गृह उनका कितना साथ देंगे, क्योकि अभी दिल्ली में दोबारा चुनाव की घोषणा नहीं हुई है!

arvind-kejriwal

दोस्तों मैंने अरविन्द केजरीवाल की जन्म तिथि इन्टरनेट से खोजी है, इसलिए मुझे सही से ज्ञात नहीं की यह जन्म तारिक कितनी हद तक ठीक है लेकिन फिर भी हम इसके आधार पर कुंडली का निरिक्षण करेगे ! अरविन्द केजरीवाल की लग्न कुंडली में वृष लग्न है और लग्न के स्वामी शुक्र की स्थिति चौथे भाव अथवा माता स्थान और राजनीती में राजनीती का स्थान है ! तो यह बात तो स्पष्ट है की लग्न के स्वामी की स्थिति राजनीती के हिसाब से अत्यधिक फलदायक है! क्योकि राजीति करियर के लिए लग्न के स्वामी का चौथे घर से सम्बन्ध अत्यधिक महत्वपूर्ण है ! अब यदि हम उनकी चालित कुंडली पर नजर डाले तो लग्न के स्वामी की स्थिति कुंडली के पाचवे भाव में है ! यदि हम राजनीती के नज़रिए से देखे तो पाचवा भाव जनता का भाव है और किसी राजनीतिग्य के लिए लग्न के स्वामी का सम्बन्ध यदि पाचवे भाव से हो जाए तो यह जनता के साथ उस व्यक्ति का एक गहरा और विशेष सम्बन्ध दर्शाता है !

अब क्योकि राजनीती करियर में चौथे भाव का इतना महत्व है तो इसके स्वामी पर भी नजर डालना अत्यधिक आवश्यक है, क्योकि चौथे भाव के स्वामी की स्थिति के आधार पर ही हम उस भाव की शक्ति का आकलन कर सकते है, लग्न कुंडली में चौथे भाव में सिंह राशी है और इसका स्वामी सूर्य अपने ही भाव में स्थित है ! दोस्तों सूर्य की स्थिति अपने ही भाव में अरिविंद केजरीवाल के राजनीती करियर के लिए एक और वरदान है, क्योकि वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य सरकार का करक है और सरकार में बने रहने के लिए सूर्य की मज़बूत स्थिति बेहद आवश्यक है ! सूर्य अपनी राशि में स्थित दसवे भाव को पूर्ण दृष्टि से देख रहा है, दसवा भाव कुंडली में सरकारी उच्च पद को दर्शता है !

पाचवे भाव के स्वामी बुध की स्थिति चौथे भाव में शुक्र के साथ, जनता के साथ एक विशेष सम्बन्ध को दर्शाता है ! और भी कई तथ्य है लेकिन समय के आभाव में मै सिर्फ विशेष तथ्यों पर ही ध्यान दूंगा ! दोस्तों अब हम चलते गुरु के पास, कुंडली के चौथे भाव में स्थित गुरु सूर्य की राशी में राजनीती के लिए एक विशेष योग का निर्माण करती है, वैसे भी गुरु की स्थिति राजनीती करियर और समाज सेवा के लिए विशेष है, ऐसे लोग इमानदार और समाजसेवक होते है ! ऐसे व्यक्तियों के पास यदि धन अर्जित करने के विशेष साधन भी हो तो भी वे उन साधनों का इस्तेमाल नहीं करते और एक साधरण जीवन व्यतीत करते है, हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की कुंडली में भी गुरु की स्थिती चौथे भाव में है ! और यही गुरु समाज सेवा और राजनीती में उठान देता है ! यदि हम केजरीवाल की मौजूदा दशाओं की बात करे तो उनकी गुरु की महादशा तथा शुक्र की अंतर दशा चल रही है दोनों ही गृह उनको समाज सेवा तथा राजनीती की तरफ धकेल रहे है, यदि दिल्ली में दोबारा विधान सभा चुनाव होते है, तो उनकी कुंडली के अनुसार ९०% से अधिक कहा जा सकता है की वे दोबारा से मुख्यमंत्री के पद तक पहुच जायेंगे ! अन्य पार्टियों को जितने के लिए उनके सामने ज्योतिष के नज़रिए से एक मज़बूत नेता खड़ा करना होगा अन्यथा उनको मुह की खानी पड़ेगी !

 

लेखक – ज्योतिषी सुनील कुमार