JUPITER IN EIGHT HOUSE OF HOROSCOPE

गुरु के प्रभाव कुंडली के आठवे भाव में

वैदिक ज्योतिष के अनुसार गुरु कुंडली के आठवे भाव में क्या फल प्रदान करता है तथा जातक के जीवन पर इसके क्या प्रभाव पड़ते है ?

अष्टम (मारक भाव)- इस भाव के गुरु के अशुभ फल ही अधिक प्राप्त होते हैं। ऐसा जातक आयु के मामले में ही भाग्यशाली होता है अन्यथा अन्य क्षेत्र में तो उसे अशुभ फल ही प्रापत होते हैं। वह यह सोचने लगता है कि ऐसी आयु भी किस काम की कि जीवन में इतने कष्ट हैं। इस गुरु के प्रभाव से जातक को गुप्त व गुदा रोग होते हैं। गुप्त रोग का कारण दुष्कर्म में ज्यादा संलग्न रहना होता है। शारीरिक सम्बन्ध बनाने से पहले यह नहीं सोचता कि वह किससे सम्बन्ध बना रहा है।

जातक गुप्त कर्म की ओर अधिक आकर्षित होता है। उसके साथी भी ऐसे ही होते हैं। यहाँ पर मैंने गुरु के योग में शोध किया है कि जातक गुप्त कार्य अवश्य करता है परन्तु गुरु पर अन्य दृष्टि अथवा युति करने वाले ग्रह के आधार पर भी फल मिलते हैं जैसे यदि गुरु पर किसी पापी ग्रह का प्रभाव है तो जातक चोरी, डकैती अथवा अन्य चोरी-छुपे करने वाले कार्य करता है और यदि गुरु पर किसी शुभ ग्रह का प्रभाव हो अथवा गुरु की अन्य किसी राशि में कोई शुभ ग्रह बैइा हो तो जातक गुप्त विद्या की ओरह अग्रसर होता है। तंत्र सिद्धि जैसे कार्य करता है तथा सफल भी होता है। यहाँ मैंने यह अवश्य देखा है कि भले ही गुप्त रोग न हों लेकिन गुदा रोग अवश्य होते हैं।

अब आप उसका कारण तंत्र सिद्धि की मेहनत, बैठक अथवा कब्ज कह लें अथवा कोई और बात। यहाँ का गुरु संतान पक्ष की ओर से भी चिन्तित करता है। ऐसे जातक के मित्र ही उसका धन उड़ाते हैं तथा अन्त में उसे धोखा भी देते हैं। गुरु के शुभ योग में जातक कुलदीपक होता है परन्तु अशुभ प्रभाव में कुलनाशक होता है। ऐसा जातक ज्योतिष में भी बहुत विश्वास करता है। इस भाव में गुरु अग्नि तत्व (मेष, सिंह व धनु) में हो तो जातक को वसीयत के माध्यम से बहुत सम्पत्ति मिलती है।

यहाँ पर मैंने अपने अनुभव में मिथुन, तुला व धनु राशि वालों को भी वसीयत प्रप्त होते देखा है जिसमें मिथुन व धनु राशि वाले गुरु के लोगों को विधवा की वसीयत प्रापत होती है। इस भाव में गुरु यदि वृश्चिक अथवा कुंभ राशि में हो तो जातक अधिक कष्ट उठाता है जिसमें व्यापार में हानि होने पर वह पुनः पैतृक सम्पत्ति से व्यवसाय जमाता है लेकिन असफल होता है। इस प्रकार धीरे-धीरे व कंगाली की ओर अग्रसर होता है। इस भाव के गुरु के किसी भी राशि में होने से जातक का अन्तिम समय बहुत ही खराब निकलता है। उसकी मृत्यु भी कष्टकारक होती है।

Click here to read in english

अगला अध्याय   गुरु कुंडली के नौवें भाव में

पिछला अध्याय   गुरु कुंडली के सातवे भाव में

Support my work by donating on Patreon.
http://patreon.com/astrologersunilkumar/

To book your telephonic astrology consultation with Astrologer Sunil Kumar click the link below
https://astrologyhoroscope.co.in/book-consultation/

To buy certified gemstones click the link below
https://astrologyhoroscope.co.in/buy-gemstones/

Astrologer Sunil Kumar Whatsapp + 91 9915576799

Email – astrologerkumar13@gmail.com

https://astrologyhoroscope.co.in https://www.facebook.com/astrologersunilkumar/