JUPITER IN NINTH HOUSE OF HOROSCOPE

गुरु के प्रभाव कुंडली के नौवे भाव में

वैदिक ज्योतिष के अनुसार गुरु कुंडली के नौवे भाव में क्या फल प्रदान करता है तथा जातक के जीवन पर इसके क्या प्रभाव पड़ते है ?

नवम (धर्म व भाग्य भाव)- इस भाव में गुरु के शुभ फल अधिक प्राप्त होते हैं। जातक बुद्धिमान व उदार होता है। समाज के साथ राज्य में भी सम्मान प्राप्त करता है। वेदों को जानने वाला तथा अपने धर्म के प्रति बहुत रुचि होती है। अपने धार्मिक कार्यों से बहुत जाना जाता है। आर्थिक रूप से बहुत समृद्ध होता है। दिल का भी बहुत साफ होता है। स्त्री वर्ग में लोकप्रिय होने के साथ कंजूस बहुत होता है।

ऐसे जातक का यदि पुत्र हो तो वह बहुत ख्याति अर्जित करता है। ऐसा व्यक्ति रूढ़िवादी बहुत होता है। व्यवसाय की दृष्टि से ऐसे जातक के लिये दर्शनशास्त्र में अध्यापन, प्रकाशक, ज्योतिषी, प्राध्यापक, वकील तथा विदेश तक में व्यापार करने वाला होता है। इस भाव में गुरु के साथ यदि केतू की युति हो तो जातक का ध्यान सन्यास की ओर जा सकता है। मंगल की इस गुरु पर दृष्टि हो तो किसी यात्रा में दुर्घटना का योग निर्मित होता है। यहाँ अग्नि तत्व (मेष, सिंह व धनु) राशि में गुरु हो तो जातक उच्चशिक्षा ग्रहण करता है। इस भाव में गुरु के पृथ्वी तत्व (वृषभ, कन्या व मकर) राशि में होने पर व्यक्ति की रुचि विज्ञान की ओर होती है। वह विज्ञान में ही उच्च शिक्षा ग्रहण करता है। आजीविका सरकारी वैज्ञानिक के रूप में प्राप्त करता है। स्वभाव की दृष्टि से वह बहुत ही स्वार्थी व संकुचित विचार वाला होता है।

पुरुष राशि (मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु व कुंभ) में गुरु भाई-बहिनों के लिये कष्टकारी होता है। भाई-बहिनल भी कम ही होते हैं। स्त्री राशि (वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर व मीन) का गुरु भाई-बहिनों के लिये बहुत ही शुभ होता है। भाई-बहिन भी अच्छी संख्या में होते हैं। इस गुरु के प्रभाव से वह बहुत ही उन्नति करते हैं परन्तु उनमें आपस में प्रेम कम होता है। मनमुटाव इस स्थिति तक होता है कि वे आपस में बोलते तक नहीं हैं। वायु तत्व (मिथुन, तुला व कुंभ) राशि का गुरु यदि भाग्य भाव में हो तो जातक को लेखन, प्रकाशन अथवा सम्पादन के क्षेत्र में कार्य करना अधिक लाभकारी होता है। जातक इस क्षेत्र में सफलता भी प्राप्त करता है।

गुरु यदि जल तत्व (कर्क, वृश्चिक व मीन) राशि में हो तो जातक उच्च शिक्षा प्राप्त करता है। न्याय के क्षेत्र में अधिक सफल बनता है। यदि पत्रिका में शुक्र का भी प्रभाव शुभ हो तो जातक न्यायाधीश भी बन सकता है। मैंने अपने अनुभव में भाग्य भाव के गुरु के शुभ फल अधिक देखे हैं। जिस प्रकार लग्न का गुरु पत्रिका के लाख दोष दूर करने की क्षमता रखता है, उसी प्रकार मेरे शोध के अनुसार भाग्य भाव का गुरु लाख नहीं तो दस हजार दोष अवश्य ही दूर करता है।

Click here to read in english

अगला अध्याय   गुरु कुंडली के दसवे भाव में

पिछला अध्याय   गुरु कुंडली के आठवे भाव में

Support my work by donating on Patreon.
http://patreon.com/astrologersunilkumar/

To book your telephonic astrology consultation with Astrologer Sunil Kumar click the link below
https://astrologyhoroscope.co.in/book-consultation/

To buy certified gemstones click the link below
https://astrologyhoroscope.co.in/buy-gemstones/

Astrologer Sunil Kumar Whatsapp + 91 9915576799

Email – astrologerkumar13@gmail.com

https://astrologyhoroscope.co.in https://www.facebook.com/astrologersunilkumar/