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यदि कुंडली के बारहवे भाव में चन्द्र हो तो जातक बचपन से ही नेत्र रोगी होता है ! जातक अत्यधिक क्रोधी और एकांत प्रिय होता है ! बारहवे भाव में चन्द्र यदि पाप प्रभाव में हो तो नेत्रों में अधिक कष्ट देता है, नेत्रों की ज्योति भी जा सकती है ! व्यक्ति ज्ञानी तो होता है परन्तु अपने ज्ञान का सभी उपयोग करने की क्षमता नहीं होती ! कई मामलो में जातक को अपने पिता का छोड़ा क़र्ज़ भी चुकाना पड़ता है, परन्तु जातक कंजूस परवर्ती का होता है वह धन बहुत सोच कर खर्च करता है !

नोट :- उपरोक्त लिखे गए सभी फल वैदिक ज्योतिष और शास्त्रों के आधार पर लिखे गए है ! सभी बारह लग्नो के आधार और अन्य ग्रहों की स्थति के आधार पर फल बदल सकते है !

लेखक  ज्योतिषी सुनील कुमार

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Precious चन्द्र ग्यारहवे भाव में 

 

 

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