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बुध कुंडली के आठवे भाव में

बुध कुंडली के आठवे भाव में

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अष्टम (मारक भाव)- इस घर में बुध व्यक्ति को धर्मात्मा व बहुत तेज मस्तिष्क का बनाता है। उसकी स्मरणशक्ति तेज होती है। समाज व राज्य में सम्मान के साथ आर्थिक समृद्धि भी दिलाता है। ऐसा व्यक्ति कृषिक्षेत्र, न्याय अथवा जहाँ मस्तिष्क शक्ति की आवश्यकता होती है, उस क्षेत्र में धनोपार्जन कर धनवान बनता है। अष्टम भाव गुप्त विद्या का भाव है, तो जातक अध्यात्म व गुप्त विद्या के क्षेत्र में भी सफल होता है। बुध यहाँ यदि अष्टम भाव के स्वामी के साथ हो तो जातक अवश्य ही दीर्घायु होता है। ऐसे जातक को कोई भी कार्य अथवा व्यवसाय किसी के साथ सम्मिलित होकर अथवा साझेदारी में नहीं करना चाहिये अन्यथा हानि प्राप्त होगी। बुध यदि यहाँ उच्च राशि में हो तथा कोई शुभ ग्रह भी देख रहा हो तो व्यक्ति को अचानक धन प्राप्ति होती है।

बुध यदि अन्य किसी त्रिक भाव अर्थात् षष्ट अथवा द्वादश भाव का स्वामी हो तो गोचर में जब भी बुध किसी भी त्रिक भाव (6, 8 व 12) में आयेगा तो व्यक्ति को अधिक धन व अन्य लाभ प्राप्त होंगे। मेरे अनुसार इस स्थिति में बुध के गोचर में विपरीत राज योग के कारण ऐसा होता है। यहाँ का बुध मस्तिष्क का स्वामी बनाता है तो दूसरी ओर वह मस्तिष्क के रोग व स्नायुरोग भी देता है, इस भाव में बुध यदि स्त्री राशि (वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर व मीन) में हो तो जीवनसाथी का स्वभाव अच्छा नहीं होगा। वह जाने-अनजाने में ही घर व व्यवसाय के गुप्त रहस्यों को शत्रुओं को बताने में नहीं हिचकता। पुरुष राशि (मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु व कुंभ) में बुध के प्रभाव से जीवनसाथी अच्छे स्वभाव का होता है। वह प्रत्येक बात को गुप्त रखने व परिवार में सुख प्रापत करने में ही आनन्द अनुभव करता है। यहाँ पर बुध के प्रभाव से जातक की मृत्यु अधिकतर मस्तिष्क विकार से होती है। बुध पाप प्रभाव में हो तो जातक को स्नायुविकार, लका?वा अथवा आँतों की शल्य क्रिया से मृत्यु सम्भव है।

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