बुध कुंडली के ग्यारहवें में

बुध कुंडली के ग्यारहवें में

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एकादश (आय भाव)- इस भाव में बुध के शुभ होने पर अधिक शुभ फल प्राप्त होते हैं। ऐसा जातक दीर्घायु, धनवान, विद्वान तथा अपने वर्ग का नेतृत्व करता है। पुत्र सन्तति से युक्त होता है। ऐसे व्यक्ति के शत्रु नहीं होते हैं। यदि बन भी जाते हैं तो उसकी ईमानदारी के कारण उसके सामने टिक नहीं पाते हैं। ऐसा व्यक्ति गायन विद्या में निपुण व प्रत्येक कार्य को विचार कर करता है। बुध जल तत्व (कर्क, वृश्चिक व मीन) राशि में होने पर व्यक्ति कभी किसी के साथ अथवा उसके नीचे कार्य नहीं कर सकता है। ऐसा व्यक्ति स्वतंत्र व्यवसाय में ही अधिक रुचि रखता है।

पृथ्वी तत्व (वृषभ, कन्या व मकर) राशि का बुध शुभ हो तो जातक को कलाकार बनाता है। अशुभ होने पर किसी का सहायक बन कर ही धन कमाता है। अग्नि तत्व (मेष, सिंह व धनु) राशि का बुध व्यक्ति को कुछ न होते हुए भी बहुत घमण्डी बनाता है। उसको इस बात का भी घमण्ड होता है कि उसके पुत्र संतान हैं। वह व्यर्थ ही अन्य लोगों से विवाद करता रहता है। अपने बडत्रे भाई के लिये कष्टकारी सिद्ध होता है। वायु तत्व (मिथुन, तुला व कुंभ) राशि का बुध व्यक्ति को मिलनसार बनाता है। शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय करता है। उसके मित्र भी अच्छे होते हैं जो लगभग सभी अपने-अपने क्षेत्र में निपुण होते हैं। ऐसा व्यक्ति अपने मित्रों के बुरे समय में समस्त प्रकार की सहायता करता है।

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