बुध कुंडली के चौथे भाव में

Click here to read in english 

चतुर्थ (सुख भाव)- इस भाव में बुध जातक को कुछ मोटे शरीर के साथ आलसी बनाता है। वह ज्ञानी, उदार, भाइयों का प्रेमी, दान करने वाला तथा वाहन सुखी अवश्य होता है। ऐसा व्यक्ति भले ही लेखन को आजीविका न बनाये परन्तु वह उच्च स्तर का लेखक, नीतिज्ञ व विद्यान अवश्य होता है। यदि हम नैसर्गिक रूप से भी देखें तो यह भाव वाहन सुख अवश्य दे सकता है।

बुध यदि पंचमेश हो तो जातक विद्या अधिक प्राप्त कर ज्ञानी हो सकता है। उसका भी मुख्य कारण केवल यही है कि बुध विद्या के भाव से द्वादश भावस्थ अर्थात् व्यय भाव में होने से अधिक विद्या का व्यय करेगा और विद्या के अधिक व्यय का मतलब है अधिक विद्या की प्राप्ति। बुध यदि शुक्र व गुरु से द्रष्ट अथवा युत हो तो उच्च वाहन की प्राप्ति होती है, क्योंकि दोनों ही धन व भोग के कारक हैं। इस भाव में यदि बुध शनि अथवा राहू से युत अथवा द्रष्ट हो तो वाहन व भवन दुर्घटना का भय होता है।बुध यदि अग्नि तत्व (मेष, सिंह व धनु) राशि में हो तो व्यक्ति अकेले में रहकर सदैव दूसरों के अहित के लिये ही सोचता रहता है। वह अपनी माँ तक को अपना शत्रु मानता है। कोई उसका भला करे तो भी वह उसका उपकार मानने के स्थान पर उसे ही नीचा दिखाने का प्रयास करता है। साथ ही अत्यन्त कंजूस व किसी का भी हित न करने वाला होता है। स्त्री राशि (वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर व मीन) का बुध जातक को व्यापार के माध्यम से हानि अधिक व लाभ कम कराता है। ऐसा व्यक्ति सभी से लड़ता रहता है। पुरुष राशि (मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु व कुंभ) का बुध थोड़ी विद्या अवश्य दिलवाता है लेकिन काफी विघ्न के बाद। यहाँ पर भी एक शर्त है कि यदि शनि का प्रभाव हो तो विद्या प्राप्ति की सम्ीाावना बिलकुल ही क्षीण हो जाती है। यदि बुध पर पंचमेश अथवा गुरु का प्रभाव हो तो अवश्य शिक्षा का स्तर अच्छा हो जाता है। यह किसी ग्रंथ में नहीं, लिखा है लेकिन मैंने अपने शोध में यही देखा हे। बुध यदि वायु तत्व (मिथुन, तुला व कुंभ) राशि में हो तो जातक अपने पिता का शत्रु होता है। धन व कुछ भी ज्ञान न होते हुए भी व्ययशील स्वभाव के साथ अत्यधिक घमण्ड करने वाला होता है।

अगला अध्याय   बुध कुंडली के पाचवे भाव में 

पिछला अध्याय   बुध कुंडली के तीसरे भाव में 

Vedic Astrologer & Vastu Expert