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बुध कुंडली के पहले भाव में

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यदि बुध कुंडली के पहले भाव में स्थित हो जातक बुद्धिमान, काम आयु में विवाहित, दीर्घायु, ईश्वर में विशवास करने वाला, हास्य स्वभाव युक्त, लेखन के क्षेत्र में आजीविका पाने वाला, अधिक खर्चालु तथा स्त्री वर्ग में अधिक प्रिय होता है | बुध पहले भाव में यदि अकेला है तो शुभ फल अधिक मिलते है अन्यथा किसी अन्य ग्रह के साथ शुभ फलों में कमी आ सकता है |

बुध यदि वायु तत्व [ मिथुन, तुला अथवा कुम्भ] राशि में स्थित तो तो जातक कलाकार और सभा में श्रेष्ठ वक्ता के रूप में प्रसिद्ध होता है | यदि धनु राशि में बुध हो तो व्यक्ति निडर और निष्पक्ष होता है |
बुध पहले भाव में यदि जल तत्व , कर्क, वृश्चिक अथवा मीन राशि में हो तो व्यक्ति को अच्छे स्वभाव का बनता है परन्तु व्यवसाय में आलोचक अथवा किसी कारणवश वाणी दोष हो सकता है |
बुध पहले भाव में यदि पृथ्वी तत्व, वृषभ, कन्या या मकर राशि में हो तो जातक एक सफल व्यापारी अथवा किसी बड़े संसथान में उच्च अधिकारी होता है | ऐसे व्यक्ति किसी से ज्यादा मेलजोल रखना पसंद नहीं करते और अकेले रहना पसंद करते है | काम बात करना और काम बोलना पसंद करता है | अगर बुध पर अन्य शत्रु गृह का असर हो तो व्यक्ति परस्त्री से सम्बन्ध का इच्छुक होता है |
बुध यदि अग्नि तत्व , मेष, सिंह अथवा धनु राशि में हो तो व्यक्ति अपने आप को दुसरो से कम बुद्धिमान समझता है और दूसरों को देखकर कार्य करना पसंद करता है |
बुध पुरुष राशि मेष, मिथुन, तुला, धनु अथवा कुम्भ राशि में होने पर जातक की शिक्षा पूर्ण नहीं पाती, परन्तु इसके उपरांत भी व्यक्ति बुद्धिमान होता है और प्रकाशक, लेखक अथवा संपादक के रूप में ख्याति प्राप्त करता है |

उपरोक्त लिखे गए बुध के पहले भाव में फल, वैदिक ज्योतिष पद्त्ति के आधार पर लिखे गए है | कुंडली में स्थित अन्य ग्रहों की स्थिति के अनुसार फल में विभिन्नता हो सकती है |

ज्योतिष सुनील कुमार

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