बुध कुंडली के सातवे भाव में

बुध कुंडली के सातवे भाव में

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सप्तम (जीवनसाथी भाव)- इस भाव में बुध मिश्रित फल देता है। एक ओर जातक को सुन्रर, दीर्घायु, व्यापार में सफल, धार्मिक स्वभाव, आर्थिक रूप से समृद्ध तथा लेखन अथवा सम्पादन के क्षेत्र में अधिक सफल बनाता है परन्तु सन्तति प्रदान करने की क्षमता से हीन करता है। इसमें भी यदि शुक्र अथवा शनि का प्रभाव हो तो जातक पूर्णतः नपुंसक भी हो सकता है। यदि इस घर में बुध के साथ शुक्र की युति हो तो जातक अत्यधिक कामी, होता है परन्तु वह अपने साथी से पूर्ण संभोग करने में असमर्थ होता है।

यह योग स्त्री-पुरुष दोनों में समान रूप से घटित होता है। इस घर के बुध पर मैंने जो शोध किया है उसमें केवल एक ही अवगुण सामने आता है कि किसी की भी पत्रिका में यह योग हो (स्त्री अथवा पुरुष) तो उसके जीवनसाथी के 90 प्रतिशत पथभ्रष्ट होने की संभावना रहती है। यदि उसकी स्वयं की पत्रिका में गुरु का शुभ प्रभाव हो तो अवश्य वह पथभ्रष्ट होने से बचता है, लेकिन मानसिक रूप से तो पथभ्रष्ट अवश्य होता है।इस घर के बुध के प्रभाव से जातक का विवाह सम्बन्ध पहली बार तो असफल होता है। बुध यदि मेष अथवा कन्या राशि में हो तो विवाह के बाद ही भाग्योदय होता है। ऐसा व्यक्ति अपने व्यवसाय में साझेदारी (पार्टनरशिप) पसन्द नहीं करता है। वह स्वतंत्र व्यवसाय का इच्छुक होता है। यदि किसी विवशता में साझेदारी करनी भी पड़े तो वह अपने भागीदार पर विश्वास नहीं करता है। व्यवसाय में वह परदेस भ्रमण में अधिक लाभ कमाता है। शौकिया लेखक भी होता है परन्तु लेखन से कोई ख्याति प्राप्त नहीं होती है। यहाँ पर बुध यदि जल तत्व (कर्क, वृश्चिक व मीन) राशि में हो तो व्यक्ति किसी के निम्न स्तरीय सहायक के रूप में आजीविका पाता है। बुध यदि पृथ्वी तत्व (वृषभ, कन्या व मकर) राशि में हो तो भी व्यक्ति ऐसा ही कोई कार्य कर धन कमाता है। यदि कोई अन्य शुभ प्रभाव हो तो अवश्य वह कोई छोटा-मोटा व्यवसाय करता है।

बुध यदि स्त्री राशि (वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर व मीन) हो तो जातक का जीवनसाथी सौम्य स्वभाव, गोल चेहरे व घुँघराले बालों वाला होता है। बुध पुरुष राशि (मेष, मिथुन सिंह, तुला, धनु व कुंभ) में हो तो जातक का जीवनसाथी शारीरिक रूप में एक पूर्ण पुरुष के समान प्रभावी चेहरे के साथ काले घने बाल व सपाट चेहरे वाला होता है।

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