Mercury in third house of horoscope

बुध के प्रभाव कुंडली के तीसरे भाव में

वैदिक ज्योतिष के अनुसार बुध कुंडली के तीसरे भाव में क्या फल प्रदान करता है और जातक पर उसके क्या प्रभाव पड़ते है ?

यदि बुध कुंडली के तीसरे भाव में स्थित हो तो जातक ज्ञानी, लेखक, कवि अथवा संपादक होता है तथा इन क्षेत्रो के द्वारा धन कमाता है | वह जातक अपने कार्य में दक्ष, मेहनती परन्तु विलासी होता है | जातक के भाई बेहेन कम हो सकता है तथा जातक को ज्योतिष शास्त्र तथा हस्तरेखा ज्ञान होता है | तीसरा भाव बुध का अपना भाव होता है इसलिए बुध से जुड़े क्षेत्र जैसे कवी, संपादन, ज्योतिष, लेखन अथवा किसी भी बोलने वाले व्यवसाय में शुभ फल देता है |

वैदिक ज्योतिष के अनुसार बुध गृह का अपने कोई बुरा अथवा अच्छा स्वभाव नहीं होता, यह जिस ग्रह के साथ होता है वैसे ही फल प्रदान करता है | इसलिए तीसरे भाव में बुध शुभ गृह के साथ शुभ और अशुभ के साथ अशुभ प्रभाव देगा |
बुध कुंडली के तीसरे भाव में यदि कर्क अथवा मीन राशि में हो तो जातक न्याय पसंद होता है, परन्तु यदि शनि से दृष्ट हो तो जातक डरपोक हो सकता है |

यदि मंगल की दृष्टि हो तो जातक के पारिवारिक तथा पड़ोसियों से सम्बन्ध अच्छे होते है और यात्राएं अधिक होती है |यदि बुध तीसरे भाव में वायु तत्व, मिथुन, तुला अथवा कुंभ राशि में स्थित हो तो जातक की रूचि तंत्र मन्त्र, ज्योतिष और गुप्त ज्ञान में होती है | यदि कुंडली में अन्य शुभ योग निर्मित हो तो जातक इन क्षत्रों में आजीविका तथा उच्च पद प्राप्त करता है | कन्या, कर्क अथवा धनु राशि में बुध जातक को उच्च श्रेणी का भविष्यकर्ता बना सकती है तथा जातक द्वारा की गयी अधिकतर भविष्यवाणियां सत्य हो जाती है |
यदि बुध तीसरे भाव में पुरुष राशि मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु अथवा कुम्भ में स्थित हो तो व्यक्ति की स्मरण शक्ति बहुत अच्छी होती है और जातक लेखन के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त करता है | बुध तीसरे भाव में स्त्री राशि कर्क, वृषभ, कन्या, वृश्चिक, मकर अथवा मीन में अशुभ प्रभाव देता है |

उपरोक्त लिखे गए बुध के कुंडली के दूसरे भाव में फल वैदिक ज्योतिष के आधार पर लिखे गए है | कुंडली में अन्य ग्रहों की स्थिति के अनुसार बुध के फल के विभिन्नता हो सकती है |

ज्योतिष सुनील कुमार

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