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मंगल यदि कुंडली के तीसरे भाव में स्थित हो तो व्यक्ति परकर्मी होता है, तथा अपने पराक्रम द्वारा आर्थिक उन्नति करता है ! परन्तु जातक को अपने भाइयो से विरोध मिलता है , जातक अपने भाइयों के लिए चाहे कुछ भी कर ले परन्तु जातक को इसका शुभ फल प्राप्त नहीं होता ! जमीन और जायजाद के कारण भाइयों में हमेशा विरोध रहता है ! तीसरे भाव में मंगल की अधिक अशुभता के कारण कई बार जातक को अपने भाइयों के कारण न्यायलय की शरण में भी जाना पड़ता है ! जातक को दुर्घटना अथवा किसी बीमारी के कारण दायें हाथ में परेशानी रह सकती है ! जातक को हमेशा वाहन चलाने में सावधानी बरतनी चाहिए क्योकि तीसरे भाव में मंगल छोटी यात्रा अथवा वाहन द्वारा दुर्घटना का कारण बन सकता है !

नोट :- उपरोक्त लिखे गए सभी फल वैदिक ज्योतिष और शास्त्रों के आधार पर लिखे गए है ! सभी बारह लग्नो के आधार और अन्य ग्रहों की स्थति के आधार पर फल बदल सकते है !

लेखक ज्योतिषी  सुनील कुमार

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Precious मंगल दुसरे भाव में