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यदि मंगल कुंडली के दसवे भाव स्थित हो तो जातक यशवान, आर्थिक रूप से सक्षम, उच्च स्तर का के वाहन का सुख भोगने वाला तथा समाज में सम्मानित होता है ! ऐसा व्यक्ति बहुत स्वाभिमानी होता है, व्यापर हमेशा किसी के अधीन होकर नहीं करता, स्वयं के प्रयासों द्वारा जातक जीवन में आगे बढता है ! परन्तु दसवे भाव में मंगल की स्थिति के कारण जातक को जीवन अत्यधिक श्रम करना पड़ता है, मंगल यदि उच्च राशी या स्वयं राशी का हो तो रुचक योग का निर्माण होता है जिसके द्वारा जातक जीवन अत्यधिक ख्याति प्राप्त करता है ! मंगल की यी स्थिति संतान पक्ष के लिए अच्छी नहीं होती, जातक को संता द्वारा परेशानियों का सामना करना पड़ता है !

नोट :- उपरोक्त लिखे गए सभी फल वैदिक ज्योतिष और शास्त्रों के आधार पर लिखे गए है ! सभी बारह लग्नो के आधार और अन्य ग्रहों की स्थति के आधार पर फल बदल सकते है !

लेखक  ज्योतिषी सुनील कुमार

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