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यदि मंगल कुंडली के पहले भाव में स्थित हो तो व्यक्ति परकर्मी होता है, स्वभाव से उग्र,कठोर और साहसी भी होता है ! किसी भी कार्य को सोच विचार कर नहीं करता ! पहले भाव में मंगल की स्थिति के कारण जातक को सर पर चोट लगने का खतरा बना रहता है अथवा बचपन में लगी चोट का निशान अवश्य ही होता है ! यदि सूर्य का प्रभाव हो तो आग से चेहरा झुलसने का खतरा बना रहता है ! परन्तु ये परिणाम मंगल के बुरे प्रभाव से ही संभव होते है! इसे व्यक्ति को व्यापार में सफलता कई मुश्किलों के बाद ही प्राप्त होती है , क्योकि ऐसा व्यक्ति हमेशा कई व्यापार एक साथ करने की कोशिश करता है , परन्तु ३५ वर्ष की आयु के बाद अवश्य ही जातक की किस्मत साथ देती है !

ऊपर लिखे गए मंगल के फल वैदिक ज्योतिष के आधार पर लिखे गए है और गृह की शुभता और अशुभता के आधार पर फल में विविधता हो सकती है !

लेखक ज्योतिषी सुनील कुमार

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