राहु तीसरे भाव में

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तृतीय (पराक्रम भाव)- कुंडली के तीसरे भाव में राहु अच्छे फल प्रदान करता है, ऐसा जातक विद्वान तथा एक अच्छा व्यापारी होता है।परन्तु पराक्रम से हीन होता है, पक्के विचार वाला, बलवान व योगाभ्यासी होता है।

इस राहू के प्रभाव से जातक की प्रथम संतान किसी प्रकार से सदा के लिये दूर होते देखा है। पहली संतान विदेश में रह सकती है ।यदि जातक अपने भाइयों के साथ रहे तो किसी की भी उन्नति नहीं होती।ऐसे जातक का जीवनसाथी अच्छे स्वभाव का होता है तथा जातक की प्रत्येक क्षेत्र में मदद करता है। जातक की चित्रकला व फोटोग्राफी में रुचि होती है और वह इन कार्यों में निपूर्ण होता है।ऐसा जातक अपने निर्णय तुरन्त लेने वाला परन्तु चंचल प्रवृत्ति का होता है।

इस राहू पर यदि शुभ प्रभाव हो तो वह जातक को भी उच्च स्थान तक पहुँचाने में सक्षम होता है। राहु तीसरे स्थान में जातक को विदेश यात्राये भी करवाता है। परन्तु राहु तीसरे स्थान में जातक के भाई व् बहनो के लिए अच्छे फल नहीं देता। कम भाई बहन होते हैं और उनसे रिश्ते ठीक नहीं रहते है। भाइयों की अपघात से मृत्यु संम्भावना होती है और उनकी संतान भी कम अथवा नहीं होती। भाई कामचोर व नकारा हो सकते हैं परन्तु वह बहिन के दुःख से दुःखी होता है। राहू यदि स्त्री राशि (वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर व मीन) में हो तो भाइयों के स्थान पर बहिनों के लिये घातक होता है।

नोट: उपरोक्त लिखे गए सभी फल वैदिक ज्योतिष के आधार पर लिखे गए है। कुंडली में स्थित अन्य ग्रहों की स्थिति के अनुसार फल में विभिन्नता हो सकती है।

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