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राहु कुंडली के दसवे भाव में

राहु दसवे भाव में

दशम (पिता व कर्म भाव)- कुंडली के दसवे भाव में राहू जातक आलसीबनता है, जातक बेहद बातूनी होता है और अपने कार्य को कभी भी नियमित तरीके से नहीं करता। जातक के संतान के साथ मतभेद रहते है। यदि जातक राजनीती में हो तो एक कठोर शासक के रूप में उभरता है, बहुत प्रतिभाशाली एवं विद्वान होता है। ऐसा जातक जीवन मे यदि मेहनत करे तो अत्यधिक सफलता प्राप्त कर सकता है।

राहु के अशुभ प्रभाव से जातक के अवैध सम्बन्ध बनते है। ऐसा जातक पिता के लिये अतिकष्टकारक होता है क्योकि दसवा भाव पिता भाव होता है। मैंने मेरे शोध में यह पाया है की दसवे स्थान में राहु पिता तथा व्यवसाय के लिए अवश्य कष्टकारी होता है। राहू यदि पुरुष राशि (मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु व कुंभ) में हो तो जातक बहुत घमंडी, विवेकहीन तथा समाज व जाति से अलग रहने वाला होता है। ऐसा जातक यदि सैन्य सेवा, पुलिस, बैंक, बीमा, रेलवे तथा कोषागार में नौकरी करे तो अधिक लाभ होता है।

राहू यदि स्त्री राशि (वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर व मीन) में हो तो जातक के पिता के साथ सम्बन्ध अच्छे नहीं होते इस कारन से जातक को पैतृक सम्पति नहीं मिलती, किसी अन्य योग से यदि पैतृक सम्पत्ति मिल भी जाये तो ज्यादा दिन नहीं टिकती। वह उसका नाश कर डालता है। ऐसा जातक अपने आरंभिक जीवन में बहुत कष्ट पाता है। काफी संघर्ष करने के बाद सफलता प्राप्त करता है। अपने वृद्धावस्था तक वह सम्पत्ति का संचय व सम्मान प्राप्त कर पाता है। अपने किसी भी कार्य में दूसरों का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करता है।

नोट: उपरोक्त लिखे गए सभी फल वैदिक ज्योतिष के आधार पर लिखे गए है। कुंडली में स्थित अन्य ग्रहों के प्रभाव से फल में विभिन्नता हो सकती है।

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