Rahu in first house of horoscope

Click here to read in english 

प्रथम भाव- पहले भाव में राहू यदि शुभ प्रभाव में हो तो जातक ज़मीन से आसमान की उचाईयों को छूता है। पहले भाव में राहु शिक्षा में अवश्य अवरोध उत्त्पन्न करता है परन्तु जातक को समाज में उच्च पद व सम्मान दिलवाता है। वह ये स्थान अचानक व शीघ्रता से प्राप्त करता है। राहु यदि पहले स्थान में हो तो जातक कभी किसी के द्वारा की गयी नींदा की चिंता नहीं करता और उसे जो मार्ग पसंद है उसी पर चलता है !

कुंडली के पहले भाव में राहू के अशुभ प्रभाव से जातक की प्रवर्ती दुष्ट किस्म की होती है, वह बहुत स्वार्थी, नीच काम करने वाला, सभी से शत्रुता रखने वाला, अत्यन्त कामी होता है, उसकी संतान भी कम होती है तथा, सिर अथवा मुख पर कोई चिन्ह अवश्य होता है, जातक के दो विवाह होने की पूरी सम्भावना रहती है तथा शरीर से रोगी और दुर्बल होता है !

राहु पहले भाव में यदि स्त्री राशि (वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर व मीन) में हो तो जातक को जीवनसाथी का सुख प्राप्त नहीं होता है। यदि पुरुष राशि (मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु व कुंभ) में हो तो जातक के दो विवाह होने की पूरी सम्भावना रहती है अथवा जातक अपनी पहली पत्नी से असंतुष्ट होता है और दूसरे साथी की तलाश में रहता है !

राहू यदि वायु तत्व (मिथुन, तुला व कुंभ) राशि का राहू वाला जातक सदैव दूसरों के कार्य को गलत कहता है और हर कार्य की निन्दा करता है। वह दूसरों के कार्यों में तो कमी निकालता है तथा हर सम्भव प्रयास करता है कि उसका कार्य किसी भी प्रकार से पूर्ण न हो परन्तु अपने कार्य में किसी का भी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करता है।

उपरोक्त लिखे गए गए सभी फल वैदिक ज्योतिष के आधार पर लिखे गए है, कुंडली में स्थित अन्य ग्रहों के प्रभाव से फल में विभिन्नता हो सकती है !

अगला अध्याय – राहु दूसरे भाव में

पिछला अध्याय – शनि बारहवे भाव में

It's only fair to share...Share on Facebook
Facebook
Tweet about this on Twitter
Twitter
Share on LinkedIn
Linkedin
Print this page
Print
Email this to someone
email