राहु पांचवे भाव में

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पंचम (संतान व विद्या भाव)- कुंडली के पांचवे भाव में राहू होने से जातक बुद्धिमान नहीं होता परन्तु किसी भी कारण से उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सफल रहता है।उसके पास धन की कमी हमेशा रहती है और यदि पैतृक धन प्राप्त हो जाये तो उसका नाश कर देता है।पांचवा भाव संतान भाव होने के कारण ऐसा राहू सन्तान पक्ष में बाधा के साथ कष्ट भी देता है। यदि ऐसा जातक लेखन का कार्य करे तो यश व धन दोनों की प्राप्ति होती है।

ऐसे राहू के प्रभाव से जातक को प्रथम संतान कन्या के रूप में प्राप्त होती है। यहाँ का राहू पितृदोष भी देता है। ऐसे जातक को यदि संतान बाधा हो तो वह पितृदोष की शान्ति अवश्य करवानी चाहिए अन्यथा संतान कष्ट कभी ख़तम नहीं होगा। इस भाव में राहू यदि पुरुष राशि (मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु व कुंभ) में हो तो जातक बहुत ही बुद्धिमान, ख्यातिवान परन्तु कुछ संकोची अथवा घमण्डी होता है। उसकी शिक्षा में अवरोध आते हैं अथवा विद्या की गति कुछ धीमी होती है।

ऐसा राहू जातक को उसकी इच्छानुसार विद्या प्राप्त नहीं होने देता है। इस कारण उसका शिक्षा में पूरा मन नहीं लगता है। जितनी उसकी योग्यता होती है, उतनी वह न तो शिक्षा ले पाता है और न ही नौकरी कर पाता है। यदि व्यवसाय करे तो भी अधिक लाभ नहीं होता। ऐसे जातकों को लाटरी और सट्टे से नुक्सान हो सकता है, इसलिए पाचवे स्थान में स्थित राहु का उपाय अवश्य करे !

उपरोक्त लिखे गए सभी फल वैदिक ज्योतिष के आधार पर लिखे गए है, कुंडली में स्थित अन्य ग्रहों के प्रभाव से फल में विभिन्नता हो सकती है।

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