Saturn in fourth house of horoscope - results & effects

शनि के प्रभाव कुंडली के चौथे भाव में

वैदिक ज्योतिष के अनुसार शनि कुंडली के चौथे भाव में क्या फल प्रदान करता है तथा जातक पर उसका क्या प्रभाव पड़ता है ?

चतुर्थ भाव में शनि यदि अपनी राशि में हो या उच्च की राशि में हो तो कुंडली में पंच महापुरुष योग का निर्माण होता है और इस योग के कारण जातक को ३५ वर्ष की आयु के पश्चात् ऐसी कामयाबी मिलती है की जातक अपने जीवन में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखता ! जातक धनवान, सुखी, पुश्तैनी सम्पत्ति प्राप्त करने वाला तथा भूमि अर्थात् खेती, खदान से लाभ प्राप्त करने वाला होता है परन्तु बहुत कंजूस होता है। यहाँ शनि दो विवाह का योग भी निर्मित करता है !

शनि यदि पृथ्वी तत्व (वृषभ, कन्या व मकर) राशि में हो तो जातक व्यापार में बहुत उन्नति करता है। परन्तु बड़ी से बड़ी नौकरी करने पर भी केवल सामान्य जीवन व्यतीत करते हें। माता पिता से विरोध होने के कारण जातक को पुश्तैनी सम्पति नहीं मिलती चाहे माता पिता अपनी संपत्ति को दान ही क्यों न कर दे ! ऐसे जातक को सौतेली माता का सुख प्राप्त होता है। वह स्वयं बहुत ही शान्त व गम्भीर होता है। शनि पर यदि किसी पाप ग्रह का प्रभाव हो तो जातक को अपने युवा पुत्र का वियोग सहना होता है। शनि यदि जल अथवा अग्नि राशि में हो तो जातक विज्ञान के विषयों में अधिक रुचि रखता है तथा उच्च शिक्षा भी इन विषयों में ही प्राप्त करता है।

नोट: उपरोक्त लिखे गए सभी फल वैदिक ज्योतिष के आधार पर लिखे गए है, कुंडली में स्थित अन्य ग्रहों के आधार पर फल में विभिन्नता हो सकती है !

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