saturn in second house of horoscope

शनि के प्रभाव कुंडली के दूसरे भाव में

वैदिक ज्योतिष के अनुसार शनि कुंडली के दूसरे भाव में क्या फल प्रदान करता है तथा जातक पर उसका क्या प्रभाव पड़ता है ?

द्वितीय (धन भाव)- कुंडली के दूसरे भाव में शनि अच्छे फल नहीं देता। परन्तु ऐसा जातक अपने जीवन में कई बार आर्थिक व सामाजिक समस्याओं का सामना करता है , समाज से विरक्त रहता है तथा जातक अपने घमण्डी स्वभाव के कारण व्यवसाय में भी असफल रहता है। तथा उचित अवसर खो देता है ! थोड़े लाभ के लिये उसे बहुत मेहनत करनी पड़ती है तथा अत्यधिक कंजूसी के बाद भी धन संचय नहीं होता। साथ ही अपने गृहस्थ जीवन में भी बहुत दुःखी रहता है। यदि शनि तुला अथवा कुंभ राशि में हो तो शुभ फल दे सकता है। इस शनि के प्रभाव से जातक कठोर वाणी वाला तथा मुख रोगी होता है, किसी कारण वश भाई से बिछड़ना पड़ता है, कुम्भ और तुला राशि में शनि जातक को धन अवश्य देगा !

मेरे शोध में ऐसा जातक अपने जीवन साथी को बहुत परेशान करता है !क्योंकि वह अपने जीवनसाथी से अक्सर कठोर भाषा में बात करता है और उसका बिलकुल भी सम्मान नहीं करता ! ऐसा जातक अपने जीवन साथी पर कभी भरोसा नहीं करता तथा उसे छोटी छोटी बातो पर प्रताड़ित करता रहता है ! 33 से 37 वर्षायु के मध्य जातक को एक घुटने में विकलांगता आ सकती है , जिसमें उसके बायें घुटने में अधिक चोट आती है। ऐसा जातक मांस-मदिरा का भी सेवन भी अधिक करता है ! ऐसे जातक के दायें नेत्र में भी कष्ट रहता है। इस भाव का शनि यदि अधिक पाप प्रभाव में हो तो जातक को अपना पेट पालने की भी हैसियत नहीं रहती !

इन सभी फलो के विपरीत यदि शनि यदि शुभ प्रभाव में हो तो जातक को पुश्तैनी धन और सम्पत्ति अवश्य प्राप्त होती है। सट्टा, शेयर, पुरानी वस्तुओं से तथा जन उपयोग कार्यों से अधिक लाभ प्राप्त कर सकता है। इसके अतिरिक्त ऐसा व्यक्ति बहुत सोच-विचार कर ही किसी व्यापार में पैसा लगाता है तथा जिसमें भी लगाता है, उसमें लाभ प्राप्त होता है। अपने धन को ब्याज तथा शेयर में लगाकर अत्यधिक वृद्धि करता है। अपने द्वारा कमाई गयी सम्पत्ति में भी वृद्धि करता है। साथ ही लोहा, अन्य धातु, चूना, तेल, पत्थर, कोयला व खनिज पदार्थ आदि से भी अधिक लाभ ले सकता है। शनि यदि तुला अथवा कुंभ राशि में हो तो फिर सभी प्रकार के आर्थिक मामलों में भी लाभ प्राप्त करता है।

शनि यदि पृथ्वी तत्व (वृषभ, कन्या व मकर) राशि में हो तो पुश्तैनी सम्पत्ति नहीं मिलती है परन्तु जातक अपनी मेहनत से ही सम्पत्ति बना लेता है। शनि यदि अग्नि तत्व (मेष, सिंह व धनु) राशि में हो तो जातक के दो विवाह हो सकते है तथा वह जीवन में धन संचय करने में असफल रहता है। ऐसा जातक पश्चिम दिशा में अधिक लाभ ले सकता है।

Note: उपरोक्त लिखे गए शनि के सभी फल वैदिक ज्योतिष के आधार पर लिखे गए है, कुंडली में स्थित अन्य ग्रहों की स्थिति के अनुसार फल में विभिन्नता हो सकती है !

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