SATURN IN NINTH HOUSE OF HOROSCOPE

शनि के प्रभाव कुंडली के नौवे भाव में

वैदिक ज्योतिष के अनुसार शनि कुंडली के नौवे भाव में क्या फल प्रदान करता है तथा जातक पर उसका क्या प्रभाव पड़ता है ?

नवम भाव [ भाग्य स्थान ] शनि यदि कुंडली के नौवे भाव में स्थित हो तो जातक वात रोगी होता है, कमज़ोर शरीर वाला होता है ! ऐसे जातक अधिकतर विदेश में रहते है ! छोटे भाव बहन नहीं होते अथवा उनसे विद्रोह रहता है !

शनि नवम भाव में जातक की विज्ञानं एवं गुप्त ज्ञान में रूचि जगाता है ! ऐसा जातक अपने जीवन में आधी धन नहीं कमाता परन्तु उसकी संतान अवश्य धनवान होती है ! यदि शनि स्वराशि अथवा उच्च का हो तो अवश्य ही जातक को अच्छे फल प्राप्त होते है और जातक धनवान हो सकता है ! उच्च का शनि जातक को धार्मिक, धनवान, न्यायिक तथा अच्छे विचार वाला बनता है ! और अपने जीवन में उच्च पद प्राप्त करता है !

यदि कुंडली में शुक्र और गुरु भी शुभ स्थिति में हो तो जातक उच्च स्टार का न्यायधीश अथवा किसी धार्मिक संस्था का मुखिया हो सकता है !

यदि शनि नवम भाव में वृषभ, कन्या, मकर, मिथुन, तुला अथवा कुम्भ राशि में स्थित हो तो अशुभ प्रभाव अधिक आते है ! यदि शनि जल तत्त्व, कर्क, वृश्चिक अथवा मीन में स्थित हो तो बहुत गरीब होता है परन्तु अपनी शिक्षा पूर्ण करने में समर्थ होता है !

ऐसे जातक यदि भाई बेहेन के साथ रहे तो किसी की भी तरक्की नहीं होती, अलग अलग रहने पर सफलता मिल सकती है ! जातक के विवाह में भी विलम्भ होता है और जब तक जीवन में स्थिरता आती है तब तक विवाह के लिए बहुत देर हो जाती है, जातक का विवाह अधिक आयु में होता है !

शनि के प्रभाव से यात्राएं अधिक होती है परन्तु यात्राओं का विशेष फल प्राप्त नहीं होता ! ऐसे जातकों को जीवन में ईमानदार रहना चाहिए तभी वे शनि के अशुभ प्रभाव से मुक्ति प्राप्त कर सकते है और जीवन को सफल बना सकते है !

नोट : उपरोक्त लिखे गए सभी फल वैदिक ज्योतिष के आधार पर लिखे गए है ! कुंडली में स्थित अन्य ग्रहों के प्रभाव से फल में विभिन्नता हो सकती है !

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