शनि कुंडली के बारहवे भाव में क्या फल प्रदान करता है ?

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बारहवा भाव (व्यय भाव)- बारहवे भाव के शनि के प्रभाव से जातक अत्यधिक खर्चीले स्वभाव का होता है ! इसलिए अशुभ फल अधिक प्राप्त होते है ! यदि आरम्भ से ही सावधानी रखे तो फिर शुभ फल अधिक प्राप्त होते हैं। उपाय करने से व्यक्ति के आर्थिक रूप से समृध की सम्भावना बनती है क्योंकि यदि आप उपाय करेंगे तो शनि अपना शुभ फल अवश्य ही देंगे। जातक अत्यधिक व्यय तभी करेगा जब उसके पास धन होगा।

जिनका शनि बारहवे स्थान में हो ऐसे लोग अपने कार्यों का स्वयं ही नाश कर लेते हैं। बाहर खाना-पीना कम करना चाहिये बारहवे स्थान के शनि वालों को विषैले प्रदार्थ और षड़यंत्र करियों से सावधान रहना चाहिए ! क्योंकि इस योग के प्रभाव से जातक को विष देने का प्रबल योग होता है। किसी भी कार्य को किसी अन्य के कहने पर नहीं करना चाहिये अन्यथा किसी शत्रु के षड्यंत्र अथवा झूठे लांछन का शिकार होकर मान-प्रतिष्ठा जाने की सम्भावना रहती है।

इस भाव में शनि मंगल का योग विशेष अशुभ फल देता है, क्योंकि इस योग में जातक की मृत्यु रक्तपात से होती है चाहे किसी दुर्घटना में अथवा किसी के द्वारा हत्या हो। यदि चन्द्र भी अशुभ अथवा मारकेश हो तो जातक आत्महत्या भी कर सकता है।

बारहवे भाव में शनि जातक को एकांत प्रिय बनता है ! ऐसा जातक व्यवसाय में असफल रहता है और अपने शत्रुओं से पीड़ा उठाता है लेकिन किसी गुप्त विद्या का ज्ञानी भी होता है।ऐसे लोगों को सदैव जानवरों से भी सतर्क रहना चाहिये। क्योकि विष योग होने के कारण विषैले जानवरो से खतरा होता है !

अशुभ शनि का प्रभाव यदि बुद्ध पर हो तो जातक पागलपन का शिकार होकर अपने शरीर को कष्ट देता है ! शनि का अशुभ प्रभाव यदि सूर्य पर हो तो जातक की ह्रदयाघात मृत्यु का योग बनता है ! ऐसे जातको को अपने ह्रदय का विशेष ख्याल रखना चाहिए और खान पान सही रखना चाहिए !

इस भाव में शनि के अशुभ फल अधिक प्राप्त होते हैं। जातक मानसिक रोगी, व्यर्थ के व्यय करने वाला, किसी व्यसन का अभ्यस्त, बुरे शब्द व अनुचित भाषा बोलने वाला, आलसी तथा मामा-मौसी के लिये कष्टकारक होता है।

यदि शनि बारहवे स्थान में होकर अशुभ प्रभाव दे तो किसी अनुभवी ज्योतिष से परामर्श कर उपाय अवश्य करे !

नोट: उपरोक्त लिखे गए सभी फल वैदिक ज्योतिष के आधार पर लिखे गए है ! कुंडली में स्थित अन्य ग्रहों के प्रभाव से विभिन्नता हो सकती है !

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