VENUS IN EIGHTH HOUSE OF HOROSCOPE

शुक्र के प्रभाव कुंडली के आठवे भाव में

वैदिक ज्योतिष के अनुसार शुक्र कुंडली के आठवे भाव में क्या फल देता है तथा जातक पर उसका क्या प्रभाव पड़ता है ?

यदि शुक्र अष्टम भाव में स्थित हो तो जातक विदेश में निवास करता है, अष्टम भाव में शुक्र यदि अशुभ प्रभाव में हो तो जातक गुप्त रोगी होता है और उसके कई अवैध सम्बन्ध भी हो सकते है ! जातक माता को कष्ट अवश्य देता है अधिक काम वासना होने के कारण अपने से बड़ी उम्र की स्त्री के साथ सम्बन्ध बनता है ! यदि बुध कुंडली में शुभ हो तो एक अच्छा ज्योतिषी बन सकता है, यदि मंगल भी शुक्र के साथ अष्टम भाव में हो तो पति या पत्नी की मृत्यु जल्दी होती है !अष्टम भाव में यदि शुक्र बलि हो तो व्यापर, जुआ, और स्त्री द्वारा धन  लाभ होता है तथा विवाह उपरांत भाग्य उदय अवश्य होता है !

अगर इस शुक्र के साथ मंगल युत हो अथवा देखता हो तो जीवनसाथी की शीघ्र मृत्यु का द्योतक है। इस भाव में शुक्र यदि वृश्चिक, कर्क, कुंभ अथवा मीन राशि में हो तो जातक किसी भी नशे का आदी होता है। कन्या राशि का शुक्र यहाँ शुभ फल नहीं देता है। जातक के विवाह के बाद उसका सभी कुछ चौपट हो जाता है। चलता हुआ व्यवसाय भी धोखा देता है। जो लाखों में खेलता था वह विवाह पश्चात् )ण लेकर गुजारा करता है। समय से पहले )ण के बोझ तले मृत्यु भी हो जाती है।

शुक्र यदि मकर अथवा सिंह राशि में हो तो जातक को पारिवारिक सुख कम मिल पाता है। इसमें मुख्य कारण संतान व जीवनसाथी से मानसिक विरोध का होना होता है। इस कारण से जातक का झुकाव अवैध सम्बन्धों की ओर हो जाता है। मैंने इस शुक्र पर जो शोध किया है, उसमें शुक्र यहाँ शुभ फल कम ही देता है। किसी पापी ग्रह की दृष्टि हो तो फिर भी कुछ शुभ फल मिल सकते हैं परन्तु युति होने पर कुछ भी सम्भावना नहीं है।शुक्र यदि मिथुन अथवा वृश्चिक राशि में होता है तो जातक को सदैव आर्थिक तंगी रहती है। व्यापार में भी अस्थिरता होती है। शुक्र वृषीा, धनु अथवा कर्क राशि में हो तो जातक को अवैध सम्बन्धों में अधिक रुचि होती है। इस अवगुण के कारण उसे गम्भीर गुपत रोग लगते हैं।

उपरोक्त लिखे गए सभी फल वैदिक ज्योतिष पर आधारित है और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर फलों में विभिन्नता हो सकती है !

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