Venus in fifth house of horoscope

शुक्र के प्रभाव कुंडली के पाचवे भाव में

वैदिक ज्योतिष के अनुसार शुक्र कुंडली के पाचवे भाव में क्या फल देता है तथा जातक पर उसका क्या प्रभाव पड़ता है ?

पंचम (संतान व विद्या भाव)- इस भाव में शुक्र जातक को सुखी, सद्गुणी परन्तु भोग-विलास में लीन, विद्वान, ईश्वरवादी तथा सभी के साथ न्याय करने वाला बनाता है। ऐसा जातक काव्य व कलाप्रवृत्ति का, सट्टे-लाटरी के साथ प्रणय व्यापार में लाभ लेने वाला होता है। उसके बहु कन्या सन्तति होती है जो अत्यधिक सुन्दर व शालीन होती है। पुरुष राशि (मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु व कंुभ) में होने पर पुत्र सन्तति ही होती है परन्तु जीवनसाथी की पत्रिका के योग पर कन्या पुत्र के बाद हो सकती है। ऐसे जातक अपने जीवनसाथी के प्रति सम्मान व प्रेम रखते हैं।

यहाँ पर शुक्र यदि स्त्री राशि (वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर व मीन) में हो तो जातक अपने जीवनसाथी को विशेष प्रेम नहीं करता है। वह केवल समाज के डर से ही उससे सम्बन्ध बनाये रखता है। उसका मन अवैध सम्बन्ध की ओर रहता है। यदि वायु तत्व (मिथुन, तुला व कुंभ) राशि में शुक्र के साथ बुध भी बैठा हो तो जातक उच्च शिक्षा प्राप्त करता है। शिक्षा अथवा लेखन के क्षेत्र में यश प्राप्त करता है। वह अत्यधिक काम-वासना से पीड़ित होता है। संतान सुख से भी वंचित होता है।

यह योग यदि स्त्री की पत्रिका में हो तो वह बन्ध्या हो सकती है। उसे प्रदर रोग अथवा मासिक काल में भी समस्या आती है। मैंने ऐसे शुक्र पर जो शोध किया है उसमें यदि यहाँ पर शनि की दृष्टि हो तो जातक की विद्या में अवरोध आता है। प्रेम में असफलता के साथ विवाह में भी अवरोध आते हैं। मंगल की दृष्टि का भी कुछ ऐसा ही फल होता है जिसमें विवाह के बाद सम्बन्ध होते हैं लेकिन विद्या में कोई समस्या नहीं आती है। शुक्र का एक विशेष प्रभाव भी देखा है कि जातक भले ही कम शिक्षा प्राप्त करे, परन्तु वह विद्वान श्रेणी का होता है। वह बहुत ही आलसी व अधिक आराम में विश्वास करने वाला होता है। अपनी आय से अधिक व्यय करने के कारण सदैव आर्थिक तंगी में रहता है।

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