Venus in ninth house of horoscope

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नवम (धर्म व भाग् भाव)- इस भाव में शुक्र के प्रभाव से जातक दयालु प्रवृत्ति का, तपस्वी, ईश्वर पर विश्वास, गृह सुखी, राज्य में सम्मान प्राप्त, गुणवान तथा कई तीर्थयात्रा तथा लम्बी विदेश यात्रा करने वाला होता है। विदेशों में कलात्मक अथवा साहित्यिक क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है।

ऐसे जातक का विवाह परदेसवासी से होता है। विवाह से आर्थिक लाभ प्राप्त होता है। विवाह के बाद भी जीवनसाथी के परिवार के सदस्यों को भी लाभ प्राप्त होता रहता है। यह योग स्त्री की पत्रिका में हो तो वह कट्टर धर्मान्ध होती है। इस भाव में उच्च अर्थात् मीन का शुक्र अधिक अशुभ फल देता है।

जातक स्त्री अथवा पुरुष कोई भी हो, व्यभिचारी होता है। शुक्र यदि पाप प्रभाव में हो तो जातक आयु से अधिक वाले से वैवाहिक सम्बन्ध करता है। जिससे विवाह करता है वह भी तलाकशुदा अथवा विधुर अथवा विधवा होती है। ऐसे जातक के माता-पिता उसके इस अवगुण के कारण उससे घृणा करते हैं। वह भी कामान्ध होकर अपने माता-पिता को शत्रु मानता है। इस भाव में शुक्र यदि पुरुष राशि में हो तो जातक के भाई अधिक व बहिनें कम होती हैं।

कन्या सन्तति अधिक व पुत्र सन्तति कम होती है। ऐसे जातक का जीवनसाथी साधारण सुन्दर होता है लेकिन फिर भी जातक उसे ही प्रेम करता है। शुक्र यदि कन्या अथवा कुंभ राशि में हो तो संतान जन्म के बाद ही जातक का भाग्योदय होता है। उसकी संतान ही उसके भाग्योदय में मदद करती है। य

दि उसके भाग्य से प्रथम संतान कन्या हो तो फिर जातक का भाग्य चमक जाता है वह आर्थिक स्थिति सुदृढ़ रहती है। यदि पहली पुत्र संतान हो तो पहले जातक बहुत धन कमाता है परन्तु बाद में सब कुछ समाप्त हो जाता है। शुक्र यदि पृथ्वी तत्व (वृषभ, कन्या व मकर) राशि में हो तो जातक का जीवनसाथी बहुत ही रूखे स्वभाव का होता है। समाज तथा आसपास के किसी से भी उसके सम्बन्ध अच्छे नहीं होते हैं। शुक्र यदि इस भाव में जल तत्व (कर्क, वृश्चिक व मीन) राशि में हो तो जातक का जीवनसाथी सुन्दर व अच्दे स्वभाव का होता है। वह अपने स्वभाव से ही सब पर अपना प्रभाव छोड़ता है।

नोट: उपरोक्त लिखे गए सभी फल वैदिक ज्योतिष के आधार पर लिखे गए है, कुंडली में अन्य ग्रहों की स्थिति के कारण फलों में विभिन्नता हो सकती है !

शुक्र दशम भाव में

शुक्र आठवे भाव में

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