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यदि शुभ सूर्य कुंडली छटे भाव में स्थित हो तो जातक के शरीर में रोगों से लड़ने की अत्यधिक क्षमता होती है, ऐसे जातक के दुश्मन अधिक हो सकते है परन्तु वे जातक को किसी तरह का नुक्सान नहीं पंहुचा सकते और जातक न्याय की बात करने वाला होता है ! परन्तु यदि यही सूर्य अशुभ स्थिति में छटे भाव में स्थित हो तो जातक किसी लम्बी चलने वाली बीमारी से ग्रस्त रहता है अशुभ सूर्य जातक के मामा के लिए भी कष्टकारी होता है ! जातक को कई राजकीय मुसीबतों का सामना करना पड़ता है !

नोट :- उपरोक्त लिखे गए सूर्य के बारह भावो के फल वैदिक ज्योतिष और शास्त्रों के आधार पर लिखे गए है ! कुंडली के बारह लग्नो के आधार पर सूर्य के भाव फल में विभिन्नता हो सकती है !

लेखक

ज्योतिषी सुनील कुमार

अगला अध्याय – सूर्य सातवे भाव में 

पिछला अध्याय – सूर्य पाचवे भाव में 

 

 

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