SUN IN TENTH HOUSE OF HOROSCOPE

सूर्य दसवे भाव में

सूर्य दशम भाव में दिग्बल प्राप्त करता है। यदि सूर्य कुंडली के दसवे भाव में स्थित हो तो जातक को अत्यधिक सम्मान प्राप्त होता है। क्योकि कुंडली का दसवा भाव मान सम्मान को दर्शाता है। जातक ऐश्वर्यशाली और राज्य से लाभ प्राप्त करता है। सूर्य दशम भाव में चिकित्सा के क्षेत्र में कामयाबी देता है, यदि सूर्य वृश्चिक राशि में स्थित हो तो जातक एक विख्यात चिकित्सक बनता है और चिकित्सा के क्षेत्र में कामयाबी हासिल करता है।

यदि सूर्य दशम भाव में तुला राशि में स्थित हो तो जातक न्याय और कानून के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है। यदि गुरु बलि होकर दृष्टि डाले तो जातक एक विख्यात न्यायधीश और वकील बन सकता है। यदि सूर्य दसवे भाव में वृषभ, कन्या, मिथुन, मकर अथवा मीन राशि में स्थित हो तो जातक अपने जीवन में बेहद उचाईयों तक पहुँचता है और कार्य क्षेत्र में उच्च पद प्राप्त करता है।

यदि कुंडली में राहु की स्थिति शुभ तथा राहु दशम भाव से सम्बन्ध बनाये तो जातक राजनीती में सफल रहता है। जातक को राजनीती में मंत्री पद अथवा किसी सभा की सदस्य्ता प्राप्त होती है। यदि सूर्य दसवे भाव में मेष, कर्क, सिंह अथवा धनु राशि में स्थित हो तो जातक पुलिस, सेना अथवा कस्टम अधिकारी का पद मिलता है। दशम भाव में सूर्य जातक को शीघ्र प्रगति देता है परन्तु जातक की वृद्ध अवस्था अच्छी नहीं होती। कामयाब होने के बावजूद जातक को वृद्ध अवस्था में संघर्षो का सामना करना पड़ता है। या तो जातक का धन खर्च हो जाता है या जातक को संतान की तरफ से कोई लाभ प्राप्त नहीं होता।

सूर्य दशम भाव में जातक को जीवन भर शुभ फल प्रदान करता है। जातक को शीघ्र सफलता के साथ धन, दौलत, मान, सम्मान सब कुछ आसानी से प्राप्त होता है बिलकुल जिस प्रकार सूर्य दोपहर तक आसमान में पहुंच जाता है परन्तु शाम होते होते सूर्य भी ढल जाता है, बिलकुल उसी प्रकार से जातक जीवन भी वृद्ध अवस्था तक ढल जाता है। यदि वृद्ध अवस्था में लग्न अथवा किसी शुभ गृह की महादशा हो तो कुछ रहत अवश्य मिलती है।

जिस भी जातक का सूर्य दशम भाव में हो उन्हें पहले से ही अपने वृद्ध जीवन के लिए विशेष तैयारियां करनी चाहिए। अपनी पूर्ण बचत को बच्चो पर खर्च न करें, अपने वृद्ध जीवन के लिए धन बचा के रखे। यदि आपके अपने गृह आपको वृद्ध अवस्था में दुख देना चाहें तो अंतिम में बच्चो का दोष निकलना व्यर्थ होगा।

नोट :- उपरोक्त लिखे गए सूर्य के बारह भावो के फल वैदिक ज्योतिष और शास्त्रों के आधार पर लिखे गए है ! कुंडली के बारह लग्नो के आधार पर सूर्य के भाव फल में विभिन्नता हो सकती है !

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