कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य के फल

Click here to read in english

प्रथम भाव- प्रथम भाव में सूर्य होने पर व्यक्ति स्वाभिमानी, क्रोधी, वात-पित्त रोगी, चंचल, प्रवासी, बुद्धिमान, तीव्र जठाराग्नि वाला, कृशदेह वाला, उच्च नासिका, उन्नत ललाट वाला, अस्थिर सम्पत्ति वाला, शूरवीर तथा वैवाहिक जीवन में कलह भोगने वाला होता है। लग्नस्थ सूर्ये संतानहीन बना सकता है। सूर्य यदि उच्च राशि अर्थात् मेष राशि का हो व कारक ग्रह से द्रष्ट हो तो जातक बुद्धिमान, समाज में विख्यात नेता, धनवान व विद्वान होता है। तुला अर्थात् नीच राशि का हो तो पापी व तेजवान तो होता है परन्तु ज्ञानी व बुद्धिमान व्यक्तियों से जलने वाला, दरिद्र व एक नेत्र से वंचित भी हो सकता है। यदि किसी शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो अशुभ फल नहीं मिलते। सूर्य यदि अपनी राशि अथवा अपने नवांश अर्थात् सिंह राशि में हो तो जातक धनी, पूज्य, प्रतिष्ठावान, प्रदेश, ग्राम अथवा समाज पंचायत का मुखिया होता है। ऐश्वर्यवान के साथ कामी व व्यभिचारी भी होता है। कर्क राशि में होने पर जातक के शरीर पर फोडे़ फुंसी अधिक होते हैं। कन्या राशि में कन्या सन्तति अधिक, स्त्री पक्ष से चिन्ता व किये गये उपकार का नाश करने वाला होता है। मकर राशि में होने पर हृदय रोगी, मीन राशि में हो तो सदैव स्त्रियों की सेवा में तत्पर रहता है।

उपरोक्त लिखे सूर्य के प्रथम भाव में फल भारतीय वैदिक ज्योतिष के आधार पर लिखे गए है, अन्य ग्रहो की की दृष्टि और अवस्था के आधार पर सूर्य के फल में अंतर आ सकता है |

ज्योतिष सुनील कुमार

अगला अध्याय – सूर्य द्वितीय भाव में 

Vedic Astrologer & Vastu Expert