केतु द्वादश भाव में

केतु बारहवें भाव में जातक को मिले जुले फल प्रदान करता है। जिसमें जातक चंचल परन्तु चतुर बुद्धि, धूर्त प्रवृत्ति का होता है। यदि केतु अशुभ प्रभाव में हो तो जातक जनता को भूत-प्रेत या अलौकिक शक्तिओं के माध्यम से अथवा भय दिखाकर ठगने वाला होता है, जबकि उसके पास ऐसी कोई सीधी नहीं होती। […]

केतु एकादश भाव में

केतु एकादश भाव में यदि बुरे प्रभाव देता है तो जातक बुद्धिहीन होता है, यह जातक हमेशा ऐसे काम करता है जिसके द्वारा उसे खुद ही नुक्सान झेलना पड़ता है। केतु ग्यारहवें भाव में होने पर जातक वात रोगी अवश्य होता है, परन्तु मेरे अनुभव में केतू इस भाव में यदि शुक्र से द्रष्ट या […]

केतु दशम भाव में

केतु दसवें भाव में जातक को भाग्यहीन बनाता है। विशेषकर दशम भाव में केतु स्थित होने पर जातक को आजीविका कमाने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जातक को कई बार नौकरी पेशा बदलना पड़ता है इसके बाउजूद जातक विशेष धन नहीं कमा सकता। जातक का हमेशा अपने पिता से विरोध व द्वेष रहता […]

केतु नवम भाव में

केतू नवम भाव में होने से जातक सुख प्राप्ति तथा भोग विलास का अत्यधिक इच्छुक होता है। वह धर्म में कम रुचि रखता है परन्तु जीवन में तीर्थ यात्रा अवश्य करता है। नवम भाव धर्म का भाव होता है, केतु यहाँ स्थित होने पर जातक सदैव दूसरों की बुराई करते रहने के कारण अपयश भी […]

केतु अष्टम भाव में

अष्टम (मारक भाव)यहां पर केतू के प्रभाव से जातक पापबुद्धि, चालाक, विपरीत लिंग से द्वेष रखने वाला तथा नीच लोगों में प्रसन्‍नता अनुभव करने वाला होता है। ऐसे जातक के दिल में बहुत गन्दगी व पाप होता है तथा किसी गुप्त रोग या गुदा रोग जैसे भगन्दर या बवासीर से भी पीड़ित होता है। इस […]

केतु सप्तम भाव में

सप्तम (जीवनसाथी भाव)इस भाव में केतू वृश्चिक राशि में तो थोड़े-बहुतत शुभ फल तथा अन्य राशि में तो बहुत ही अशुभ फल देता है जिसमें जातक मूर्ख, मन्दबुद्धि, डरपोक, सुख से दूर, अपने वैवाहिक जीवन सेदुःखी, कर्कश स्वभाव वाला तथा अत्यन्त कामी होता है। जीवनसाथी भी अवैध रिश्तों में विश्वास करने वाला होता है। ऐसा […]