केतु छटे भाव में

षष्ठम (शत्रु व रोग भाव)इस भाव में केतू के प्रभाव से जातक विद्वान, सुखी, उदार, दृढ़ निश्चयी, अच्छे गुण वाला, शत्रु हीन, वातरोगी परन्तु भूत-प्रेत जनित रोगों का रोगी, .वातविकार से पीड़ित व झगड़ालू स्वभाव का होता है। ऐसे व्यक्ति हर किसी से तो सम्मान पा लेते हैं परन्तु मामा व मौसी पक्ष से का […]

केतु पंचम भाव में

पंचम (संतान व विद्या भाव)इस भाव में केतू जातक को षड्यंत्रकारी विचारों वाला बनाता है, ऐसे जातक के गन्दे विचार व दुष्ट बुद्धि होती है। वातरोगी, अनैतिक कार्यों में लीन होता है। ऐसा जातक गुप्त विद्या या हिप्नोटिस्म, मनोविज्ञान में विशेष रुचि रखता है , अल्प संतान जिसमें कन्या सन्तत्ति अधिक होती है तथा जातक […]

केतु चतुर्थ भाव में

चतुर्थ (सुख भाव)-इस भाव में केतू अशुभ फल अधिक देता है जिसमें जातक का कार्य में मन नहीं लगना,चंचल व वाचाल प्रवृत्ति, दूसरों के कार्य में मीनमेख निकालने वाला व उत्साहहीन बनाता है। ऐसा जातक माता के लिये कष्टदायक, कभी भी एक स्थान पर न रुकने वाला व पैतृक सम्पति की हानि उठाने वालाहोता है। […]

केतु तीसरे भाव में

यदि केतु कुंडली के तृतीय भाव में हो तो जातक व्यर्थ बोलने वाला होता है किसी भी छोटी बात को अधिक देर तक अधिक लंबा करके बोलता है। जातक चंचल अवश्य होता है तथा भूत प्रेत को पूजा और तंत्र के माध्यम से वश में करने की विद्या का भी ज्ञानी होता है ऐसे जातक […]

केतु द्वितीय भाव में

केतु यदि कुंडली के द्वितीय भाव में हो तो जातक मुख्य रोगी होता है तथा जातक की वाणी अच्छी नहीं होती वह हमेशा हर किसी का विरोध करता है तथा अशुद्ध वाणी का प्रयोग करता है। जातक पापी स्वभाव का होता है और हमेशा कटु वचन का प्रयोग करता है उसकी संगति भी अच्छी नहीं […]

केतु पहले भाव में

इस भाव में केतु के प्रभाव से जातक चंचल व डरपोक प्रवृत्ति का होता है।दुराचारी किसी ना किसी चिंता में रहने वाला मूर्ख होता है।   ऐसे जातक का अपने भाइयों से क्लेश रहता है  क्योंकि जातक के भाई-बहन जातक से जलने वाले द्वेष रखने वाले होते हैं वह कभी भी जातक की कामयाबी में […]