केतु द्वितीय भाव में

केतु यदि कुंडली के द्वितीय भाव में हो तो जातक मुख्य रोगी होता है तथा जातक की वाणी अच्छी नहीं होती वह हमेशा हर किसी का विरोध करता है तथा अशुद्ध वाणी का प्रयोग करता है। जातक पापी स्वभाव का होता है और हमेशा कटु वचन का प्रयोग करता है उसकी संगति भी अच्छी नहीं … Read more

केतु पहले भाव में

इस भाव में केतु के प्रभाव से जातक चंचल व डरपोक प्रवृत्ति का होता है।दुराचारी किसी ना किसी चिंता में रहने वाला मूर्ख होता है।   ऐसे जातक का अपने भाइयों से क्लेश रहता है  क्योंकि जातक के भाई-बहन जातक से जलने वाले द्वेष रखने वाले होते हैं वह कभी भी जातक की कामयाबी में … Read more