चंद्र सातवे भाव में

चंद्र सप्तम भाव में जातक को शांत और सभ्य स्वभाव का बनाता है। जातक बहुत शांत स्वभाव तथा धैर्यवान होता है। किसी भी कार्य को करने में जल्दी नहीं करता। पूर्णतया विचार विमर्श के पश्चात् ही कोई निर्णय लेता है। चंद्र सप्तम भाव में जातक को अच्छा व्यापारी बनाता है। जातक व्यापर करके बहुत धन […]

चंद्र आठवे भाव में

चंद्र अष्टम भाव में अत्यधिक कष्टकारी होता है। ऐसा जातक सदैव रोगग्रस्त रहता है। जातक की रोग से लड़ने की क्षमता कम होती है जिसके कारण जातक को छोटी से छोटी बिमारी जल्दी लग जाती है। जातक को नेत्र से सम्बंधित रोग होता है। कुंडली का अष्टम भाव मारक भाव होता है इसीलिए चंद्र अष्टम […]

चंद्र नौवे भाव में

चंद्र नवम भाव में शुभ तथा अशुभ दोनों प्रकार के फल प्रदान करता है। ऐसे जातक को अपने जीवन में संतान का पूर्ण सुख प्राप्त होता है तथा जातक अपने बल पर सम्पत्ति भी अर्जित करता है। यदि चंद्र कुंडली के नवम भाव में हो तो जातक के भाई बहनो की संख्या कम होती है […]

चंद्र दसवे भाव में

दशम भाव में चन्द्रमा जातक को बुद्धिमान बनाता है, ऐसा जातक अपने अच्छे कर्मो द्वारा जीवन में अपने कुल का नाम रोशन करता है और कुलदीपक कहलाता है। जातक की उम्र लम्बी होती है। जातक शांत स्वभाव का होता है और सदैव समाजिक कल्याण के कार्यों में लगा रहता है। यदि चन्द्रमा दशम भाव में […]

चंद्र ग्यारहवे भाव में

एकादश भाव में चन्द्रमा यदि शुभ स्थिति में हो तो जातक को धन तथा संतान की कमी नहीं होने देता। जातक अत्यधिक धन कमाता है और संतान अवश्य होती है। जातक बहुत बुद्धिमान होता है। अपने क्षेत्र में लोकप्रिय तथा राज्य से लाभ प्राप्त करता है। एकादश भाव में चन्द्रमा की शुभ स्थिति हो तो […]

चंद्र बारहवे भाव में

मित्रों कुंडली का द्वादश अथवा बारहवां भाव रोग तथा खर्चे का भाव होता है। यदि चन्द्रमा कुंडली के द्वादश भाव में स्थित हो तो जातक नेत्र रोग से पीड़ित रहता है। जातक को कफ रोग भी होता है। ऐसा जातक अत्यधिक क्रोध करने वाला तथा किसी का साथ पसंद नहीं करता। जातक को एकांतवास अथवा […]