बुध छटे भाव में

षष्ठ (शत्रु व रोग भाव)- इस भाव में बुध प्रायः अशुभ फल अधिक देता है। व्यक्ति आलसी, नित्य नये विषय पर कलह व विवाद करने वाला व रोगी होता है। मैंने अनुभव किया है कि यहाँ पर बुध रोग अवश्य देता है। व्यक्ति रोगों से लड़ते-लड़ते कमजोर हो जाता है। इसी कमजोरी के कारण वह […]

बुध पाचवे भाव में

पंचम (संतान व विद्या भाव)- इस भाव में बुध के शुभ फल अधिक प्राप्त होते हैं। ऐसे जातक समाज में सम्मान पाने के साथ संगीत प्रेमी भी होते हैं, साथ ही विद्वान, सदाचारी, सदैव प्रसन्न रहने वाले तथा श्रमशील होते हैं। यह भाव विद्या का है। किसी भी भाव के स्वामी का द्वादश भाव में […]

बुध चौथे भाव में

चतुर्थ (सुख भाव)- इस भाव में बुध जातक को कुछ मोटे शरीर के साथ आलसी बनाता है। वह ज्ञानी, उदार, भाइयों का प्रेमी, दान करने वाला तथा वाहन सुखी अवश्य होता है। ऐसा व्यक्ति भले ही लेखन को आजीविका न बनाये परन्तु वह उच्च स्तर का लेखक, नीतिज्ञ व विद्यान अवश्य होता है। यदि हम […]

बुध तीसरे भाव में

यदि बुध कुंडली के तीसरे भाव में स्थित हो तो जातक ज्ञानी, लेखक, कवि अथवा संपादक होता है तथा इन क्षेत्रो के द्वारा धन कमाता है | वह जातक अपने कार्य में दक्ष, मेहनती परन्तु विलासी होता है | जातक के भाई बेहेन कम हो सकता है तथा जातक को ज्योतिष शास्त्र तथा हस्तरेखा ज्ञान […]

बुध दूसरे भाव में

यदि बुध कुंडली के दूसरे भाव में स्थित हो तो जातक मधुरभाषी, अच्छा वक्ता, सुखी, सुन्दर, अधिक मीठा पसंद करने वाला, तथा न्याय के क्षेत्र में धन कमाने वाला होता है | ऐसा जातक कंजूस परन्तु साहसी व् अच्छे कार्य करने वाला होता है | बुध कुंडली के दूसरे भाव में यदि शुभ स्थिति में […]

बुध पहले भाव में

यदि बुध कुंडली के पहले भाव में स्थित हो जातक बुद्धिमान, काम आयु में विवाहित, दीर्घायु, ईश्वर में विशवास करने वाला, हास्य स्वभाव युक्त, लेखन के क्षेत्र में आजीविका पाने वाला, अधिक खर्चालु तथा स्त्री वर्ग में अधिक प्रिय होता है | बुध पहले भाव में यदि अकेला है तो शुभ फल अधिक मिलते है […]